
मोतिहारी। शारदीय नवरात्र के आगमन के साथ ही पूर्वी चंपारण में मां दुर्गा की आराधना को लेकर भक्तिमय माहौल है। पूजा पंडालों में कलश स्थापना के लिए जल यात्रा निकाली जा रही है। इसी क्रम में रामायणकालीन धार्मिक मान्यता से जुड़े प्राचीन सीताकुंड धाम से जल लेकर कलश यात्रा निकालने की परंपरा निभाई जा रही है। पिपरा प्रखंड के सिरसिया में दुर्गा पूजा समिति की ओर से आयोजित कलश यात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। ढोल-नगाड़ों और मां दुर्गा के जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया।

सीताकुंड धाम से जल लेकर निकली सिरसिया की कलश यात्रा
पिपरा प्रखंड के सिरसिया में दुर्गा पूजा समिति की ओर से हर वर्ष सीताकुंड धाम से जल लाकर कलश यात्रा निकालने की परंपरा निभाई जाती है। इस वर्ष भी समिति के सदस्य और श्रद्धालु सीताकुंड धाम पहुंचे। यहां से जल लेकर गाजे-बाजे और ढोल-नगाड़ों के साथ कलश यात्रा निकाली गई।

यात्रा में महिलाएं, बच्चे और अन्य श्रद्धालु शामिल हुए। मां दुर्गा के जयकारों और स्तुति गान से माहौल भक्तिमय बना रहा। श्रद्धालुओं ने पारंपरिक विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना की।
भगवान श्रीराम की बारात के विश्राम से जुड़ी है मान्यता
मोतिहारी का प्राचीन सीताकुंड धाम धार्मिक आस्था के लिए विशेष महत्व रखता है। स्थानीय धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान श्रीराम और माता सीता के विवाह के बाद जनकपुर से लौट रही बारात तीसरे दिन इस स्थान पर रुकी थी। मान्यता है कि बारात में शामिल लोगों ने यहां विश्राम किया था।
कहा जाता है कि सुबह माता सीता ने सीताकुंड में स्नान किया और भगवान शिव की आराधना के लिए शिवलिंग की स्थापना की थी। इसी मान्यता के चलते सीताकुंड धाम को श्रद्धालु आस्था और धार्मिक परंपरा से जुड़े महत्वपूर्ण स्थल के रूप में देखते हैं।
नवरात्र में सीताकुंड के जल का विशेष महत्व
नवरात्र के दौरान सीताकुंड धाम से जल लेकर पूजा पंडालों तक पहुंचाने और कलश स्थापना करने की परंपरा स्थानीय धार्मिक संस्कृति का हिस्सा है। सिरसिया की दुर्गा पूजा समिति समेत विभिन्न पूजा समितियों के श्रद्धालु इस परंपरा का निर्वहन करते हैं।
श्रद्धालुओं के लिए यह यात्रा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सामूहिक आस्था और परंपरा से जुड़ने का अवसर भी है। कलश यात्रा में बच्चों, महिलाओं और अन्य श्रद्धालुओं की भागीदारी नवरात्र के प्रति लोगों की श्रद्धा को दर्शाती है।
आस्था, परंपरा और मां दुर्गा की आराधना
नवरात्र के अवसर पर सीताकुंड धाम में श्रद्धालुओं की आवाजाही और विभिन्न पूजा समितियों की गतिविधियां क्षेत्र की धार्मिक परंपराओं को सामने लाती हैं। सीताकुंड से जल लेकर निकली सिरसिया की कलश यात्रा इसी आस्था का प्रतीक है, जिसमें श्रद्धालु मां दुर्गा की आराधना के साथ सुख-शांति और समृद्धि की कामना करते हैं।


