Homeबिहारबड़हिया के मां बाला त्रिपुर सुंदरी मंदिर में नवरात्र की धूम, 151...

बड़हिया के मां बाला त्रिपुर सुंदरी मंदिर में नवरात्र की धूम, 151 फीट ऊंचा गुंबद बना आकर्षण

Published on

spot_img
spot_img
- Advertisement -

बिहार के लखीसराय जिले के बड़हिया स्थित प्रसिद्ध सिद्ध मंगलापीठ मां बाला त्रिपुर सुंदरी जगदंबा मंदिर में शारदीय नवरात्र को लेकर तैयारियां शुरू हो गई हैं। मंदिर को भव्य रूप से सजाया जा रहा है और नवरात्र के पहले दिन से ही दर्शन-पूजन के लिए श्रद्धालु पहुंचने लगे हैं। धार्मिक मान्यताओं के कारण प्रसिद्ध इस मंदिर में बिहार के अलावा दूसरे राज्यों से भी भक्त आते हैं। मान्यता है कि बड़हिया के इस मंदिर में भी मां वैष्णो देवी जैसी शक्ति विराजमान है।

- Advertisement -

151 फीट ऊंचा गुंबद और स्वर्ण कलश है खास आकर्षण

मंदिर का 151 फीट ऊंचा सफेद संगमरमर से निर्मित विशाल गुंबद और उसके ऊपर स्थापित स्वर्ण कलश दूर से ही श्रद्धालुओं का ध्यान खींचता है। मंदिर को ‘कामना पूर्ति मंदिर’ के नाम से भी जाना जाता है।

- Advertisement -

यहां मां दुर्गा की पारंपरिक प्रतिमा के बजाय गंगा की मिट्टी से निर्मित पिंड स्वरूप की पूजा की जाती है। नवरात्र के दौरान मंदिर को आकर्षक ढंग से सजाया जाता है। मंगलवार और शनिवार को भी यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं।

मंदिर का ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व

बड़हिया स्थित मां बाला त्रिपुर सुंदरी जगदंबा मंदिर को स्थानीय स्तर पर ‘महारानी स्थान’ के नाम से भी जाना जाता है। यह लंबे समय से क्षेत्र के श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र रहा है।

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, बड़हिया के मूल निवासी पंडित श्रीधर ओझा ने मां वैष्णो देवी की स्थापना के बाद यहां मां बाला त्रिपुर सुंदरी जगदंबा की स्थापना की थी। स्थानीय कथाओं के मुताबिक, उस समय बड़हिया के पूर्व में गंगा और पश्चिम में हरुहर नदी बहती थी। क्षेत्र का बड़ा हिस्सा जंगलों से घिरा हुआ था और विषैले सांपों की समस्या भी थी।

मान्यता है कि सर्पदंश की घटनाओं से परेशान ग्रामीणों की मदद के लिए श्रीधर ओझा ने मां जगदंबा की आराधना की। कहा जाता है कि मां ने उन्हें सर्पदंश से बचाव और उपचार से जुड़ी विधि बताई। इसके बाद उन्होंने बड़हिया में मां की स्थापना की। इसी मान्यता से मंदिर का धार्मिक महत्व जुड़ा हुआ है।

मंदिर से जुड़ी एक अन्य स्थानीय मान्यता के अनुसार, सर्पदंश से पीड़ित व्यक्ति को यहां स्थित कुएं के जल से स्नान कराने पर लाभ मिलता है। हालांकि, सांप के काटने की स्थिति में तुरंत अस्पताल पहुंचना और उचित चिकित्सकीय उपचार कराना बेहद जरूरी है।

पिंड स्वरूप में विराजती हैं मां जगदंबा

मंदिर की सबसे खास विशेषता मां बाला त्रिपुर सुंदरी का पिंड स्वरूप है। यहां गंगा की मिट्टी से निर्मित पिंड की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां जगदंबा यहां महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती के स्वरूप में विराजमान हैं।

मंदिर का गर्भगृह जमीन से लगभग 12 फीट ऊंचा बताया जाता है। इसके ऊपरी तल पर मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की प्रतिमाएं स्थापित हैं। श्रद्धालु इन प्रतिमाओं के दर्शन भी करते हैं।

मंदिर में मां का दैनिक पुष्प शृंगार और सुबह-शाम होने वाली आरती विशेष आकर्षण का केंद्र है। भक्तों का विश्वास है कि सच्चे मन से मां के दरबार में प्रार्थना करने पर उनकी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। इसी कारण इसे कामना पूर्ति मंदिर भी कहा जाता है।

नवरात्र में बढ़ जाती है श्रद्धालुओं की भीड़

मंदिर के मुख्य पुजारी दिग्विजय कुमार झा के अनुसार, मां बाला त्रिपुर सुंदरी का यह मंदिर सिद्ध शक्तिपीठ के रूप में प्रसिद्ध है। यहां श्रद्धालुओं की गहरी आस्था है और हर मंगलवार व शनिवार को दूर-दराज के क्षेत्रों से भक्त दर्शन के लिए पहुंचते हैं। शारदीय और वासंती नवरात्र के दौरान श्रद्धालुओं की संख्या और बढ़ जाती है।

लखीसराय और बड़हिया के कई परिवार अपने शुभ कार्यों की शुरुआत मां के दरबार में पूजा-अर्चना के साथ करते हैं। किसी संकट या विपत्ति के समय भी लोग मां के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। नवरात्र के अलावा मुंडन और उपनयन संस्कार जैसे धार्मिक आयोजनों के लिए भी मंदिर में श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है।

श्रद्धालुओं के ठहरने की भी व्यवस्था

दूर-दराज से आने वाले भक्तों की सुविधा के लिए मंदिर ट्रस्ट की ओर से श्रीधर सेवाश्रम की स्थापना की गई है। यहां धार्मिक आयोजनों के साथ बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं के ठहरने की व्यवस्था भी की गई है।

नवरात्र के दौरान मंदिर परिसर में विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक गतिविधियों के चलते भक्तिमय माहौल रहता है। मंदिर को सजाने और श्रद्धालुओं के स्वागत की तैयारियां भी की जा रही हैं।

दूसरे राज्यों से भी दर्शन के लिए आते हैं भक्त

मां बाला त्रिपुर सुंदरी मंदिर की ख्याति बिहार के बाहर भी है। धार्मिक मान्यता है कि जो श्रद्धालु जम्मू स्थित मां वैष्णो देवी के दर्शन के लिए नहीं जा पाते, उनमें से कई बड़हिया के इस मंदिर में आकर पूजा-अर्चना करते हैं।

भक्तों का विश्वास है कि मां के इस दरबार में उन्हें आध्यात्मिक शांति और आस्था का संबल मिलता है। इसी विश्वास के कारण बिहार के विभिन्न जिलों के साथ दूसरे राज्यों से भी श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं।

शारदीय नवरात्र के अवसर पर मंदिर में दर्शन-पूजन का सिलसिला शुरू हो गया है। श्रद्धालु मां के दरबार में पूजा-अर्चना कर अपने परिवार की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना कर रहे हैं।

ताज़ा ख़बरें...

‘20 साल बेमिसाल’ थीम पर विकास प्रदर्शनी, नीतीश कुमार ने किया उद्घाटन

गयाजी: बिहार में पिछले दो दशकों के दौरान हुए विकास कार्यों और सरकार की...

JDU के प्रदेश सचिव बने सोनू रजक, उमेश सिंह कुशवाहा और नीतीश पटेल का जताया आभार

पटना: जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के युवा प्रकोष्ठ में प्रदेश सचिव बनाए जाने पर...

Menopause: आखिरी पीरियड के आसपास शरीर में क्यों हो सकते हैं अचानक बदलाव? नई स्टडी में हुआ बड़ा खुलासा

Health : मेनोपॉज यानी रजोनिवृत्ति को आमतौर पर महिलाओं के शरीर में होने वाला...

IND vs WI: निर्णायक मुकाबले से पहले टीम इंडिया में बड़ा बदलाव, भुवनेश्वर की एंट्री से किसका कटेगा पत्ता?

Sports : भारत और वेस्टइंडीज के बीच पांच मैचों की टी20 इंटरनेशनल सीरीज का...

ये भी पढ़ें...

‘20 साल बेमिसाल’ थीम पर विकास प्रदर्शनी, नीतीश कुमार ने किया उद्घाटन

गयाजी: बिहार में पिछले दो दशकों के दौरान हुए विकास कार्यों और सरकार की...

JDU के प्रदेश सचिव बने सोनू रजक, उमेश सिंह कुशवाहा और नीतीश पटेल का जताया आभार

पटना: जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के युवा प्रकोष्ठ में प्रदेश सचिव बनाए जाने पर...

Menopause: आखिरी पीरियड के आसपास शरीर में क्यों हो सकते हैं अचानक बदलाव? नई स्टडी में हुआ बड़ा खुलासा

Health : मेनोपॉज यानी रजोनिवृत्ति को आमतौर पर महिलाओं के शरीर में होने वाला...