
New Delhi: देश की राजधानी दिल्ली में विरोध प्रदर्शन और धरना देने की जगह एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। दिल्ली पुलिस के नए आदेश के मुताबिक ऐतिहासिक जंतर-मंतर को अब निर्धारित प्रदर्शन स्थल के रूप में मान्यता नहीं दी गई है। इसकी जगह रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और पूर्वी दिल्ली के सीबीडी मैदान को वैकल्पिक स्थलों के तौर पर तय किया गया है। इस फैसले पर कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके और सह संयोजक सौरव दास ने सरकार पर निशाना साधा है।

“अब पूरा देश जंतर-मंतर बनेगा”
जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाए जाने पर अभिजीत दिपके ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जंतर-मंतर अब विरोध की जगह नहीं रही, क्योंकि उनके मुताबिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे पहले ही युद्ध का मैदान बना दिया था। उनका कहना है कि अब पूरा देश जंतर-मंतर बनेगा।

दिपके ने यह भी कहा कि वे प्रधानमंत्री की कथित तानाशाही के खिलाफ अपनी लड़ाई जारी रखेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को बचाने के लिए नागरिकों के खिलाफ सख्त रुख अपना रही है, और सवाल उठाया कि ज्ञानेश कुमार सरकार के लिए इतने जरूरी क्यों हैं कि उनके बचाव में पुलिस को लोगों से टकराव की स्थिति में आना पड़ रहा है।
पुलिस कार्रवाई पर भी उठाए सवाल
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर भी दिपके ने दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर नाराजगी जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि युवाओं, पत्रकारों और यहां तक कि सांसदों के साथ भी पुलिस मारपीट कर रही है। एक दूसरी पोस्ट में उन्होंने प्रधानमंत्री को टैग करते हुए सरकार पर अपने ही देश के लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने और तानाशाही रवैया अपनाने का आरोप लगाया।
दादी के निधन के बीच पुलिस के रवैये का दावा
महाराष्ट्र में पत्रकारों से बात करते हुए दिपके ने एक निजी पीड़ा भी साझा की। उन्होंने बताया कि उनकी दादी के निधन से परिवार पहले ही शोक में था। उनके मुताबिक, अगर पुलिस को दादी के निधन की जानकारी थी, तो रात करीब 3:30 बजे गिरफ्तारी के कागजात लेकर उनके पास पहुंचकर हस्ताक्षर क्यों मांगे गए।
दिपके का दावा है कि पुलिस ने उनसे माता-पिता से बात करने को कहा, लेकिन उन्होंने माता-पिता की खराब सेहत का हवाला देकर उस समय बात करने से मना कर दिया। इसके बाद उन्होंने अपने चचेरे भाई से संपर्क करना चाहा, लेकिन उनके अनुसार पुलिस ने उन्हें फोन से नंबर निकालने नहीं दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस का मकसद उन्हें और पहले से दुखी उनके माता-पिता को तनाव देना था, और इसे उन्होंने अपने परिवार के लिए मानसिक प्रताड़ना बताया।
सौरव दास का सवाल, जंतर-मंतर ही क्यों हटाया?
जंतर-मंतर को सूची से हटाए जाने पर कॉकरोच जनता पार्टी के सह संयोजक सौरव दास ने भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने एक्स पर पूछा कि आखिर नरेंद्र मोदी जंतर-मंतर से क्यों डरते हैं। उन्होंने इस फैसले को सरकार की आलोचना करने वालों के अधिकारों से जोड़ते हुए पूछा कि अगर सरकार जनता की आवाज सुनने को तैयार है, तो विरोध के लिए तय जगह को ही सूची से हटाने की जरूरत क्यों पड़ी।
इस पूरे मामले ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार और असहमति जताने की आजादी को लेकर बहस तेज कर दी है। ध्यान रहे कि दिपके और सौरव दास के सभी आरोप उनके अपने बयानों और पोस्ट पर आधारित हैं, और इन पर दिल्ली पुलिस या सरकार की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया अभी सामने नहीं आई है।


