
Ranchi: मात्र 700 रुपये की घूस लेने के पुराने मामले में आरोपी पूर्व राजस्व कर्मचारी भानु प्रताप प्रसाद को ACB Special Court ने 1 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही अदालत ने उन पर 5 हजार रुपये का जुर्माना भी ठोका है। अगर वे जुर्माने की रकम जमा नहीं करते हैं, तो उन्हें 3 महीने की अतिरिक्त साधारण जेल काटनी होगी। यह पूरा मामला साल 2002 का है, जब भानु प्रताप गुमला अंचल में बतौर कर्मचारी तैनात थे।

89 डिसमिल जमीन के म्यूटेशन के बदले मांगी थी घूस, रंगे हाथ हुए थे अरेस्ट
पूरा मामला जमीन के दाखिल-खारिज (म्यूटेशन) से जुड़ा हुआ था। शिकायतकर्ता ललकारियूश मिंज ने अपनी 89 डिसमिल जमीन के दाखिल-खारिज के लिए आवेदन दिया था, जिसके एवज में भानु प्रताप ने 700 रुपये घूस की मांग की थी। पीड़ित की शिकायत पर जाल बिछाते हुए ACB ने 8 सितंबर 2002 को कार्रवाई की और कर्मचारी को 100-100 रुपये के 7 नोटों के साथ रंगे हाथ दबोच लिया था। तलाशी के दौरान उनकी जेब से 6,500 रुपये नकद भी बरामद किए गए थे।

15 गवाहों की गवाही से साबित हुआ जुर्म
ACB के विशेष लोक अभियोजक आलोक कुमार सिंह ने अदालत में अभियोजन पक्ष को मजबूती से पेश किया और मामले में कुल 15 गवाहों की गवाही दर्ज कराई। तमाम साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर विशेष अदालत ने भानु प्रताप प्रसाद को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दोषी करार देते हुए सजा मुकर्रर की।
बड़गाईं जमीन घोटाले में भी रहे हैं आरोपी, ED कर चुकी है अरेस्ट
गौरतलब है कि भानु प्रताप प्रसाद रांची के बड़गाईं अंचल में उप-राजस्व कर्मचारी भी रह चुके हैं और राज्य के चर्चित जमीन घोटालों में मुख्य आरोपी के तौर पर सामने आए थे। सेना के कब्जे वाली 4.55 एकड़ जमीन और बड़गाईं अंचल की 8.86 एकड़ जमीन के फर्जीवाड़े में भी उनकी सीधी संलिप्तता सामने आई थी। इस मामले में ED ने उन्हें 13 अप्रैल 2023 को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। हालांकि जमीन घोटाले के मामलों में वे फिलहाल जमानत पर बाहर चल रहे हैं।


