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वासेपुर के गैंगस्टर फहीम खान और अनिल शर्मा की रिहाई खारिज, सरकार ने 53 कैदियों को दिया बड़ा झटका

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Wasseypur gangster: झारखंड की अलग-अलग जेलों में बंद कई चर्चित अपराधियों और गंभीर मामलों के सजायाफ्ता कैदियों को राज्य सरकार से बड़ा झटका लगा है। सरकार ने धनबाद के वासेपुर निवासी गैंगस्टर फहीम खान, हजारीबाग के अनिल शर्मा और सुरेंद्र बंगाली समेत कुल 53 कैदियों की समयपूर्व रिहाई के प्रस्तावों को सीधे तौर पर खारिज कर दिया है। सरकार ने मर्डर, गैंगरेप, फिरौती के लिए किडनैपिंग और जेल से बाहर आने के बाद दोबारा जुर्म करने की आशंका को देखते हुए यह कड़ा रुख अपनाया है। 30 जुलाई को हुई झारखंड राज्य सजा पुनरीक्षण पर्षद की बैठक में जेल अधीक्षक, SP, प्रोबेशन पदाधिकारी और संबंधित कोर्ट की रिपोर्ट पर विचार करने के बाद अब आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी गई है।

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वासेपुर के फहीम खान की रिहाई पर SC में रिव्यू पिटीशन दाखिल करेगी सरकार
इस पूरी लिस्ट में सबसे ज्यादा चर्चा धनबाद के वासेपुर निवासी 63 वर्षीय फहीम खान की है, जो इस वक्त जमशेदपुर की घाघीडीह जेल में बंद है। HC और SC के निर्देशों के बाद उसकी रिहाई पर विचार किया गया था, लेकिन पर्षद की पड़ताल में सामने आया कि वह एक शातिर गैंगस्टर है और उसका अपने इलाके में गहरा असर है। संबंधित कोर्ट, SP और प्रोबेशन अफसर तीनों की रिपोर्ट फहीम खान के खिलाफ आई। पर्षद का मानना है कि उसके बाहर आने से समाज में गलत संदेश जाएगा और शांति व्यवस्था बिगड़ सकती है। इसी वजह से सरकार ने SC के 20 जुलाई 2026 के आदेश के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दाखिल करने का फैसला किया है।

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अनिल शर्मा से गैंगवार की आशंका, सुरेंद्र बंगाली और नरेंद्र सिंह को भी राहत नहीं
हजारीबाग की जयप्रकाश नारायण जेल में बंद 65 वर्षीय गैंगस्टर अनिल शर्मा की समयपूर्व रिहाई की अर्जी भी खारिज कर दी गई है। रिपोर्ट के अनुसार, उसने जेल में बंद रहने के दौरान ही एक कैदी का मर्डर कर दिया था और पहले न्यायिक हिरासत से फरार होने का रिकॉर्ड भी रहा है। पुलिस और खुफिया रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि उसके बाहर आने पर इलाके में खूनी गैंगवार छिड़ सकता है। वहीं दोहरे हत्याकांड के दोषी सुरेंद्र बंगाली की रिहाई भी नामंजूर हुई है क्योंकि उसने महेश पांडेय और उनके भाई दोनों का मर्डर किया था। इसके अलावा एक जनप्रतिनिधि की दिनदहाड़े हत्या के आरोपी नरेंद्र सिंह उर्फ पंडित की अर्जी को भी यह कहते हुए खारिज कर दिया गया कि ऐसे मामलों में रिहाई से कानून के राज पर आम जनता का भरोसा टूटता है।

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