
Chatra: चतरा जिले में बालू के कारोबार में नियमों की अनदेखी का मामला एक बार फिर सामने आया है। देर शाम अपर समाहर्ता अरविंद कुमार ने डीएवी स्कूल के पास बालू से लदे एक ट्रैक्टर को जांच के लिए रोका। जब चालक से कागजात मांगे गए, तो उसने 12 अक्टूबर की सुबह 9:30 बजे जारी किया गया चालान दिखाया। बालू उठाव वाली जगह से चतरा जिला मुख्यालय की दूरी लगभग 25 किलोमीटर है। ऐसे में यह सवाल उठ खड़ा हुआ कि सुबह के चालान पर देर शाम तक बालू की ढुलाई किस नियम के तहत की जा रही थी।

ट्रैक्टर जब्त, खनन विभाग को लिखा गया पत्र
मामले की गंभीरता को देखते हुए अपर समाहर्ता ने ट्रैक्टर को तुरंत जब्त कर लिया और उसे सदर थाने को सौंप दिया। इसके साथ ही आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए जिला खनन विभाग को पत्र लिखा गया है। इस कार्रवाई के बाद पूरे जिले में चालान के सहारे चल रहे बालू के खेल पर सवाल उठने लगे हैं। अंदेशा जताया जा रहा है कि एक ही चालान का इस्तेमाल बार-बार बालू ढोने के लिए किया जा रहा था, जिससे सरकार को राजस्व का बड़ा नुकसान हो रहा है।

एक ही पास पर दिनभर कई चक्कर लगाने की शिकायत
स्थानीय लोगों की शिकायत है कि हंटरगंज प्रखंड से जिला मुख्यालय तक बालू लाने वाले कई ट्रैक्टर चालक सुबह 100 सीएफटी बालू का चालान कटवाते हैं। इसके बाद उसी एक चालान की आड़ में दिनभर में कई चक्कर लगाकर बालू की सप्लाई करते हैं। इसके अलावा इटखोरी जैसे इलाकों में रात के अंधेरे में बिना चालान के ही अवैध बालू उठाने की शिकायतें भी लगातार मिलती रही हैं।
पूरे सिस्टम की जांच की उठ रही मांग
अपर समाहर्ता की इस पहल से अवैध बालू कारोबार पर रोक लगाने की उम्मीद जगी है। हालांकि जानकारों का मानना है कि केवल एक ट्रैक्टर पकड़ने से यह खेल बंद नहीं होगा। इसके लिए बालू घाट से लेकर बिक्री तक के पूरे सिस्टम की जांच जरूरी है। चालान जारी होने का समय, बालू की मात्रा और गाड़ियों की आवाजाही का सही मिलान करने पर ही इस बड़े खेल का सच सामने आ सकेगा।


