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रांची से चल रहा विदेशी नागरिकों को ठगने का खेल, फर्जी कॉल सेंटर से अमेरिका और नीदरलैंड के लोगों को निशाना बना रहे साइबर ठग

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Crime Desk: झारखंड में इन दिनों अवैध फर्जी कॉल सेंटर्स का दायरा सिर्फ देश तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यहां से विदेशी नागरिकों को निशाना बनाकर करोड़ों रुपये ऐंठे जा रहे हैं। साइबर अवेयरनेस के लिए काम करने वाली संस्था ‘एंटी हैकिंग ग्रुप’ की जांच में सामने आया है कि राजधानी रांची में ऐसे इंटरनेशनल फर्जी कॉल सेंटर तेजी से पैर पसार रहे हैं। इस नेटवर्क में बंगाल और पूर्वोत्तर (नॉर्थ-ईस्ट) के राज्यों से युवक-युवतियों को लाकर काम पर रखा गया है। स्थानीय लोगों की नजरों से बचने के लिए ये कॉल सेंटर्स पूरी रात काम करते हैं और यहां काम करने वाले कर्मी आसपास के लोगों से किसी तरह का मेलजोल नहीं रखते। कर्मचारियों को इसके बदले आकर्षक सैलरी के साथ रहने और खाने की सुविधाएं दी जाती हैं।

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एजेंट, वेरिफायर और क्लोजर टीम का त्रिस्तरीय ढांचा

जांच में सामने आया है कि इन फर्जी कॉल सेंटर्स में काम करने वाले कर्मचारियों को व्यवस्थित तरीके से अलग-अलग रोल्स में बांटा जाता है। पहली कैटेगरी में एजेंट टीम होती है, जिसके सदस्य खुद को माइक्रोसॉफ्ट का ग्लोबल कस्टमर सर्विस सपोर्ट बताकर अमेरिका और नीदरलैंड जैसे देशों के नागरिकों को कॉल करते हैं। वे अल्ट्राव्यूअर जैसे रिमोट डेस्कटॉप सॉफ्टवेयर के जरिए पीड़ितों के कंप्यूटर और लैपटॉप का एक्सेस ले लेते हैं। सिस्टम का कंट्रोल मिलते ही वे पीड़ितों को डराते हैं कि उनके कंप्यूटर में ड्रग्स या पोर्नोग्राफी से जुड़ा गैर-कानूनी डेटा मौजूद है। इसके बाद वेरिफायर टीम डेटा और केस की पुष्टि करती है।

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अमेरिकी अधिकारी बनकर गिरफ्तारी का खौफ, क्रिप्टो में वसूली

इसके बाद सिंडिकेट की ‘क्लोजर टीम’ एक्टिव होती है। क्लोजर टीम के सदस्य अमेरिकी जांच एजेंसी या पुलिस अधिकारी बनकर पीड़ितों को कॉल करते हैं और उन पर केस दर्ज कर गिरफ्तार करने की धमकी देते हैं। गिरफ्तारी से बचने और कानूनी कार्रवाई खत्म करने के नाम पर पीड़ितों से क्रिप्टोकरेंसी और इंटरनेशनल बैंक ट्रांसफर के जरिए मोटी रकम ट्रांसफर करा ली जाती है।

अनजान कॉल और रिमोट ऐप्स से रहें सावधान: एक्सपर्ट्स

एंटी हैकिंग ग्रुप के साइबर एक्सपर्ट संजीत कुमार ने आम लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। उन्होंने बताया कि कोई भी बड़ी टेक कंपनी खुद कॉल करके सिस्टम में वायरस होने या टेक्निकल सपोर्ट देने का दावा नहीं करती। उन्होंने लोगों से अपील की है कि किसी अनजान कॉल या मैसेज के झांसे में आकर अपने कंप्यूटर या मोबाइल में कोई रिमोट एक्सेस ऐप डाउनलोड न करें और न ही किसी को सिस्टम का रिमोट कंट्रोल सौंपें।

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