
Digital Desk Naxatra Samachar: राजधानी रांची के पॉश इलाके अशोक नगर रोड नंबर-1 में रास्ते की रार को लेकर सीनियर IPS व रेल DIG आलोक प्रियदर्शी और पत्रकार सैयद शरीफ इब्राहिम के बीच छिड़ी जंग में मंगलवार (13 अक्टूबर) को अदालत की चौखट पर जमकर कानूनी तीर चले। SDM कोर्ट द्वारा जारी नोटिस के बाद दोनों पक्षों के वकील आमने-सामने थे। जब DIG के वकील ने पल्ला झाड़ते हुए दलील दी कि उनके मुवक्किल ने कोई रास्ता नहीं रोका बल्कि यह काम सोसाइटी का है, तो पत्रकार के वकील ने अदालत में सीधा और चुभता हुआ सवाल दाग दिया, ‘अगर रास्ता सोसाइटी ने बंद किया, तो फिर एक सीनियर IPS की सरकारी गाड़ी किसके हुक्म से गेट के ठीक सामने अड़ाकर रास्ता रोका गया?’

इस तीखे सवाल का कोई ठोस जवाब नहीं आ सका। वहीं, जिनके कंधे पर ठीकरा फोड़ा जा रहा था, उस अशोक नगर कोऑपरेटिव सोसाइटी की तरफ से सुनवाई में कोई हाजिर ही नहीं हुआ।

SDM की अदालत में कानूनी दंगल, एक पक्ष ने पेश किए दस्तावेज तो दूसरे ने मांगा वक्त
SDM सदर की अदालत ने 3 अक्टूबर को ही नोटिस जारी कर दोनों पक्षों और अशोक नगर हाउसिंग कोऑपरेटिव सोसाइटी को 13 अक्टूबर की तारीख पर तलब किया था। आज हुई सुनवाई के दौरान पत्रकार सैयद शरीफ इब्राहिम की ओर से उनके वकील ने वर्ष 1963 से चल रहे रास्ते के इस्तेमाल, आरआरडीए (RRDA) के नक्शे और जमीनी हक से जुड़े तमाम वैध दस्तावेज अदालत के सामने मेज पर रख दिए। दूसरी तरफ, डीआईजी आलोक प्रियदर्शी के वकील की ओर से कोई भी जमीनी दस्तावेज पेश नहीं किया जा सका और लिखित जवाब (W.S.) दाखिल करने के लिए कोर्ट से वक्त की मोहलत मांग ली गई।
‘स्टेटस को’ के बावजूद रात में गिराए बोल्डर, धारा 223 BNS के तहत याचिका
पत्रकार के अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि SDM कोर्ट में मामला लंबित होने (Misc. Case No. M-2842/2026, धारा 166 BNSS) और शांति व्यवस्था बनाए रखने (Status Quo) के स्पष्ट निर्देश के बावजूद कानून को खुलेआम ठेंगा दिखाया गया। 3 और 4 अक्टूबर की दरमियानी रात अंधेरे का फायदा उठाकर पत्रकार के मुख्य गेट के ठीक सामने ईंटों की कतार और पत्थर के भारी-भरकम बोल्डर डंप कर दिए गए, जिससे पांच घरों में रहने वाले छह परिवारों का निकलना पूरी तरह बंद हो गया।
अदालती आदेश की इस खुली अवहेलना को लेकर पत्रकार की तरफ से भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 223 के तहत एक अलग आपराधिक याचिका दाखिल की गई। इसमें मांग की गई है कि कोर्ट के आदेश का उल्लंघन कर रास्ता रोकने वालों के खिलाफ संज्ञेय अपराध के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
सरकारी स्कॉर्पियो से रास्ता बंद करना और धमकियों का उठा मामला
बहस के दौरान 29 सितंबर की उस शाम का भी जिक्र हुआ, जब DIG के इस्तेमाल वाली सरकारी स्कॉर्पियो को पत्रकार के गेट पर सटाकर खड़ा कर दिया गया था। कोर्ट को बताया गया कि जब गाड़ी हटाने की गुहार लगाई गई तो उल्टे हथियारबंद बॉडीगार्ड्स के साथ पहुंचकर AK-47 से भूनने और झूठे मुकदमों में जिंदगी तबाह करने की धमकियां दी गईं। पत्रकार पक्ष ने दो टूक कहा कि एक जिम्मेदार पुलिस अफसर का यह आचरण न सिर्फ आम नागरिक के अधिकारों पर डाका है, बल्कि यह कानून के राज का खुला मखौल भी है।
थाना और CO से रिपोर्ट तलब, अब 17 नवंबर को होगी अगली सुनवाई
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और दस्तावेजों का अवलोकन करने के बाद SDM कोर्ट ने मामले को बेहद गंभीरता से लिया है। अदालत ने अरगोड़ा थाना प्रभारी और संबंधित अंचल अधिकारी (CO) को विवादित स्थल की जमीनी हकीकत, रास्ते की मौजूदा स्थिति और आदेश के उल्लंघन पर विस्तृत जांच रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया है। अब अदालत ने इस पूरे विवाद की अगली सुनवाई के लिए 17 नवंबर की तारीख मुकर्रर की है।
हाईकोर्ट में क्रिमिनल रिट याचिका, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और गृह सचिव वंदना दादेल तक शिकायत पहुंचने के बाद अब एसडीएम कोर्ट में प्रशासनिक रिपोर्ट तलब होने से पुलिस महकमे में हलचल और तेज हो गई है। अब देखना यह है कि 17 नवंबर को थाना और सीओ की रिपोर्ट में क्या सच सामने आता है और क्या DIG पक्ष अगली तारीख पर अपनी दलीलों के समर्थन में कोई कानूनी कागजात पेश कर पाता है।


