
Jharkhand High Court: झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य पुलिस की स्पेशल ब्रांच में नियुक्त दारोगाओं को सामान्य (जिला) पुलिस कैडर में शामिल करने की मांग पर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि स्पेशल ब्रांच और जिला पुलिस के लिए एक ही संयुक्त परीक्षा आयोजित होने मात्र से दोनों का कैडर एक नहीं हो जाता। न्यायमूर्ति दीपक रोशन की अदालत ने 174 अभ्यर्थियों की दो याचिकाओं का निष्पादन करते हुए स्पेशल ब्रांच के पदों को सामान्य कैडर में बदलने का आदेश देने से इनकार कर दिया।विज्ञापन में ‘क्लोज्ड कैडर’ न लिखना प्रशासनिक चूक, अभ्यावेदन की छूटअदालत ने माना कि वर्ष 2017 की दारोगा भर्ती के विज्ञापन (संख्या 05/2017) में स्पेशल ब्रांच के पदों के ‘क्लोज्ड कैडर’ (बंद कैडर) होने का स्पष्ट उल्लेख न होना विभागीय और प्रशासनिक चूक थी।

अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र मिलने के बाद पता चला कि बंद कैडर के कारण उनके स्थानांतरण और पदोन्नति की संभावनाएं सीमित हैं। कोर्ट ने याचियों को आदेश अपलोड होने के 4 सप्ताह के भीतर गृह विभाग के सक्षम प्राधिकार के समक्ष विस्तृत अभ्यावेदन देने की छूट दी है। सक्षम प्राधिकार को अभ्यावेदन मिलने के 12 सप्ताह के भीतर नियमानुसार कारणयुक्त आदेश पारित करना होगा।2009 का सरकारी संकल्प बहाल, भविष्य के विज्ञापनों के लिए निर्देशराज्य सरकार ने अदालत में दलील दी थी कि खुफिया जानकारी जुटाने जैसे विशेष कार्यों के लिए 2009 के संकल्प और 2010 की अधिसूचना के तहत स्पेशल ब्रांच का अलग बंद कैडर बनाया गया था।

हाईकोर्ट ने माना कि विज्ञापन में जानकारी छूट जाने से लागू कैडर व्यवस्था समाप्त नहीं हो जाती। इसके साथ ही अदालत ने राज्य सरकार और JSSC को सख्त निर्देश दिया कि भविष्य में जारी होने वाले सभी भर्ती विज्ञापनों में प्रत्येक पद के कैडर और उससे जुड़ी सेवा शर्तों का स्पष्ट उल्लेख किया जाए, ताकि अभ्यर्थी सोच-समझकर अपनी प्राथमिकता तय कर सकें।


