
Bokaro : बोकारो की 18 वर्षीय युवती पुष्पा कुमारी के लापता होने के मामले में झारखंड HC ने राज्य सरकार और जांच अधिकारियों के ढीले रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई है। मंगलवार को जस्टिस एसएन प्रसाद और जस्टिस अखिल कुमार की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए दो टूक चेतावनी दी कि यदि अगली तारीख तक जांच रिपोर्ट और ठोस जवाब दाखिल नहीं किया गया, तो पूरे मामले की जांच और इसमें शामिल लापरवाह अधिकारियों की भूमिका की पड़ताल CBI को सौंपने पर विचार किया जाएगा।

बिना एफिडेविट सुनवाई पर आपत्ति, महाधिवक्ता ने दिया रिपोर्ट पेश करने का भरोसा
अदालत ने इस बात पर सख्त एतराज जताया कि इतने लंबे समय बाद भी पुलिस की ओर से कोई ठोस शपथ पत्र दाखिल नहीं किया गया है। खंडपीठ ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि किसी संवेदनशील मामले को इस तरह अनिश्चितकाल के लिए पेंडिंग नहीं रखा जा सकता। इस पर राज्य सरकार की ओर से पेश महाधिवक्ता ने अदालत को भरोसा दिलाया कि अगली तारीख पर जांच की पूरी रिपोर्ट और अब तक की गई कार्रवाई का पूरा ब्योरा पेश कर दिया जाएगा। इस आश्वासन के बाद अदालत ने सरकार को एक आखिरी मौका देते हुए अगली सुनवाई 27 अक्टूबर तय की है। मामले में प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता रोहित विंसेंट मार्की, जबकि सरकार की ओर से महाधिवक्ता रोहित रंजन रॉय और अधिवक्ता जयंत फ्रैंकलिन टोप्पो उपस्थित रहे।

जुलाई 2025 से लापता है पुष्पा, बेटी की तलाश में मां ने दाखिल की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका
बोकारो की रहने वाली पुष्पा कुमारी जुलाई 2025 से ही संदिग्ध हालात में लापता है। परिजनों का आरोप है कि युवती के गायब होने के तुरंत बाद स्थानीय थाने में शिकायत की गई थी, लेकिन पुलिस ने शुरुआती दौर में इसे गंभीरता से नहीं लिया। पुलिस की इसी सुस्ती और बेपरवाही से तंग आकर पीड़िता की मां ने झारखंड HC का दरवाजा खटखटाया और हेबियस कॉर्पस याचिका दाखिल की। मां ने अदालत से अपनी बेटी की जल्द बरामदगी और जांच में लापरवाही बरतने वाले पुलिस पदाधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। हाईकोर्ट पूर्व में भी इस मामले को लेकर पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर चुका है, ऐसे में अब सबकी नजरें 27 अक्टूबर की सुनवाई पर टिकी हैं।


