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2040 में कैसी दिखेगी रांची?, JVM श्यामली के बच्चों ने बनाकर दिखा दिया फ्यूचर!

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Ranchi:  कहीं बिना तार के डेटा भेजने वाली Li-Fi तकनीक का मॉडल था तो कहीं भूस्खलन से पहले खतरे का अलर्ट देने वाला सिस्टम, किसी छात्र ने AI की मदद से काम करने वाली तकनीक दिखाई तो किसी ने यह बताया कि वर्ष 2040 में रांची कैसी हो सकती है। बुधवार को जवाहर विद्या मंदिर (JVM), श्यामली में आयोजित ‘अभिज्ञान–2026’ में बच्चों की ऐसी ही एक से बढ़कर एक प्रतिभाएं देखने को मिलीं। स्कूल के LKG से लेकर 12वीं तक के 2000 से अधिक छात्रों ने 800 से ज्यादा मॉडल तैयार किए, जिनमें विज्ञान, गणित, तकनीक, पर्यावरण, कला और सामाजिक मुद्दों से जुड़े कई दिलचस्प प्रयोग शामिल थे। खास बात यह रही कि छोटे बच्चों ने भी अपने मॉडल के जरिए बड़े-बड़े विषयों को आसान तरीके से समझाने की कोशिश की, जबकि सीनियर छात्रों ने AI, स्मार्ट पार्किंग, मैग्लेव ट्रेन और अंतरिक्ष में बसावट जैसे विषयों पर अपनी सोच सामने रखी।

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जवाहर विद्या मंदिर, श्यामली में बुधवार सुबह 8:30 बजे से शुरू हुए इस आयोजन का उद्घाटन झारखंड सरकार के ग्रामीण विकास विभाग के सचिव मनोज कुमार ने किया। दयानंद ऑडिटोरियम में कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक लोकगीतों, अतिथियों के स्वागत और दीप जलाने के साथ हुई। इसके बाद बच्चों ने कथक नृत्य, स्वागत गीत और नशा मुक्ति पर आधारित नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में विद्यालय प्रबंधन समिति के सदस्य अभय कुमार, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की प्रबंधिका इसलीन कौर, प्राचार्य बीएन झा सहित कई अतिथि, शिक्षक और विभिन्न विश्वविद्यालयों से आए निर्णायक मंडल के सदस्य मौजूद रहे।

छोटे बच्चों ने दिखाई ऋतुओं और त्योहारों की दुनिया, सीनियर छात्रों ने पेश की नई तकनीक

प्रदर्शनी में सबसे छोटे बच्चों की भागीदारी भी खास रही। LKG के 180 बच्चों ने ‘ब्यूटी ऑफ सीजन्स’ थीम पर अलग-अलग ऋतुओं को मॉडल के जरिए समझाया, जबकि UKG के 150 बच्चों ने भारतीय त्योहारों पर अपनी प्रस्तुति दी। कक्षा एक और दो के 151 बच्चों ने आसपास के परिवेश, खानपान, जीव-जंतुओं और प्रदूषण जैसे विषयों पर 151 मॉडल बनाए।

कक्षा तीन से पांच के छात्रों ने विज्ञान में मानव आंख, मिनी वैक्यूम क्लीनर, मिट्टी से रोटी तक का सफर, हरित ऊर्जा और ‘फ्यूचर रांची 2040’ जैसे मॉडल पेश किए। गणित में क्रिकेट के जरिए मैथ्स समझाने, फ्रैक्शन पिज्जा और ज्योमेट्रिकल पार्क जैसे प्रयोग आकर्षण का केंद्र रहे। इसके अलावा बेकार सामान से तैयार 100 कलाकृतियों, पेंटिंग और लोक कला के प्रदर्शन ने भी लोगों का ध्यान खींचा।

वहीं, कक्षा छह से दस के छात्रों ने ग्रेविटी बैटरी, Li-Fi, टेस्ला कॉइल, मैग्नेटिक लेविटेशन और लैंडस्लाइड अलर्ट सिस्टम जैसे मॉडल प्रस्तुत किए। केमिस्ट्री में एडिबल वाटर ब्लॉब और फूड फ्रेशनेस इंडिकेटर, बायोलॉजी में डिजिटल पेशेंट और स्मार्ट एग्रीकल्चर, जबकि कंप्यूटर साइंस में ‘जार्विस एंड विजन AI’ और स्मार्ट पार्किंग सिस्टम के जरिए छात्रों ने तकनीक से जुड़ी अपनी समझ दिखाई।

11वीं और 12वीं के छात्रों ने भी कई जटिल विषयों को मॉडल के जरिए समझाने की कोशिश की। फिजिक्स में लेजर फोटो फोन और मैग्लेव ट्रेन, बायोलॉजी में प्लास्टिक खाने वाले सूक्ष्मजीव और ‘ऑर्गन ऑन अ चिप’, इकोनॉमिक्स में ईरान युद्ध के आर्थिक प्रभाव और ‘AI वैल्यूएशन बबल’ जैसे विषय शामिल रहे। पॉलिटिकल साइंस में साउथ चाइना सी और स्पेस कॉलोनाइजेशन पर भी मॉडल पेश किए गए।

30 साल बाद अपने स्कूल लौटे ग्रामीण विकास सचिव, पुरानी यादें कीं साझा

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मनोज कुमार के लिए यह आयोजन खास रहा, क्योंकि वह इसी विद्यालय के पूर्व छात्र हैं। बच्चों को संबोधित करते हुए उन्होंने बताया कि वर्ष 1995 में उन्होंने इसी स्कूल से 12वीं की पढ़ाई पूरी की थी। करीब तीन दशक बाद अपने पुराने स्कूल पहुंचकर उन्होंने यहां बिताए दिनों को याद किया और कहा कि यह संस्थान उनके लिए सिर्फ एक स्कूल नहीं, बल्कि जीवन में खास जगह रखता है।

उन्होंने छात्रों को समझाया कि आज के समय में केवल एक विषय की जानकारी होना काफी नहीं है, बल्कि अलग-अलग विषयों को जोड़कर समझना भी जरूरी है। विज्ञान, गणित, कला और सामाजिक विज्ञान को एक साथ सीखने से बच्चों की सोच विकसित होती है और वे किताबों में पढ़ी बातों को असल जिंदगी से जोड़ पाते हैं।

प्राचार्य बीएन झा ने भी छात्रों की मेहनत की सराहना करते हुए कहा कि शिक्षा का मतलब केवल किताबें पढ़ना या उत्तर याद करना नहीं है। बच्चों में सवाल पूछने, सोचने, समझने और कुछ नया बनाने की आदत विकसित करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि ‘अभिज्ञान–2026’ इसी सोच के साथ आयोजित किया गया है, ताकि विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा दिखाने और नए प्रयोग करने का अवसर मिल सके।

प्रदर्शनी के दौरान निर्णायक मंडल के सदस्यों ने अलग-अलग कमरों में जाकर छात्रों के मॉडल देखे और उनसे सवाल पूछे। बच्चों ने अपने प्रोजेक्ट के पीछे की सोच और उसके काम करने के तरीके को समझाया। इस दौरान अभिभावक, शिक्षक और दूसरे विद्यालयों के छात्र भी प्रदर्शनी देखने पहुंचे। रांची के निर्मला कॉलेज के 50 छात्रों ने भी आयोजन में भाग लिया।

प्रदर्शनी के साथ रक्तदान शिविर भी लगा

‘अभिज्ञान–2026’ के दौरान JVM एलुम्नी एसोसिएशन की ओर से विद्यालय के विजिटर्स रूम में रक्तदान शिविर का भी आयोजन किया गया। सुबह 10 बजे से दोपहर दो बजे तक चले इस शिविर में पूर्व छात्रों, शिक्षकों और आगंतुकों ने हिस्सा लिया। शिविर के जरिए लोगों को रक्तदान के महत्व और जरूरतमंदों की मदद करने का संदेश दिया गया।

विद्यालय प्रबंधन के मुताबिक, इस आयोजन का उद्देश्य बच्चों को केवल प्रतियोगिता में हिस्सा दिलाना नहीं, बल्कि उनमें वैज्ञानिक सोच, रचनात्मकता, टीमवर्क और आत्मविश्वास विकसित करना था। प्रदर्शनी में बच्चों ने जिस तरह अपने मॉडल तैयार किए और उन्हें लोगों के सामने समझाया, उससे उन्हें अपनी पढ़ाई को व्यावहारिक रूप में पेश करने का अवसर मिला।

 

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