
वैशाली: बिहार के वैशाली जिले के राघोपुर में गंगा नदी में हुए नाव हादसे ने कई परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया है। हादसे में 13 बच्चों की डूबने से मौत हो गई, जबकि कुछ लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया। हादसे से बचाए गए बच्चों ने उस भयावह पल की कहानी बताई, जब नाव में पानी भरने लगा और देखते ही देखते नाव पलट गई।

बच्चों के मुताबिक, नाव में छेद होने के कारण पानी अंदर आने लगा था। कुछ लोगों ने पानी निकालने की कोशिश भी की, लेकिन पानी तेजी से भरता गया। इस बीच कुछ लोगों ने अपनी जान बचाने के लिए नदी में छलांग लगाई, जबकि कई लोग नाव में फंस गए।

‘नाव में मेरे साथ 25 लोग थे, दादाजी ने मुझे बचाया’
हादसे से बचाए गए आदित्य कुमार ने बताया कि नाव में करीब 25 लोग सवार थे। नाव में एक छोटा-सा छेद था, जिससे पानी अंदर आने लगा। धीरे-धीरे पानी बढ़ता गया और आखिरकार नाव पलट गई।
आदित्य ने बताया कि हादसे के दौरान एक व्यक्ति ने उन्हें बचाने में मदद की। उन्होंने एक व्यक्ति का पैर पकड़ लिया, जिसके बाद उस व्यक्ति ने उन्हें अपने कंधे पर उठा लिया। फिर उसने दूसरे व्यक्ति को बुलाया और पेड़ की एक मोटी डाल की मदद से आदित्य को संभाला। इसके बाद उन्हें तैरकर किनारे तक पहुंचाया गया।आदित्य के मुताबिक, इस तरह उनकी जान बच सकी। हादसे के बाद बच्चों की आपबीती ने नाव में मौजूद लोगों के सामने आई मुश्किलों को उजागर किया है।
‘नाव पलटने से पहले पानी में कूद गया था’
अभिराज नाम के एक अन्य बच्चे ने बताया कि नाव में करीब 20 लोग सवार थे। अचानक नाव पलटने लगी। स्थिति बिगड़ती देख वह नाव पूरी तरह पलटने से पहले ही पानी में कूद गया।
अभिराज के मुताबिक, उसके साथ मौजूद कई अन्य लोग पानी में डूब गए। वहीं, अंश नाम के बच्चे ने बताया कि नाव में छेद होने से पानी भरने लगा था। एक व्यक्ति पानी बाहर निकालने की कोशिश कर रहा था, लेकिन आगे बढ़ने के साथ पानी तेजी से अंदर आने लगा। अंततः नाव पानी से भर गई और पलट गई। बच्चों के बयानों से नाव की स्थिति और हादसे के दौरान बचाव के प्रयासों को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं।
जर्जर नाव और प्रशासनिक लापरवाही पर उठे सवाल
हादसे के बाद नाव की स्थिति और सुरक्षा इंतजामों को लेकर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों की ओर से नाव के जर्जर होने और पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने की शिकायतों की बात सामने आई है।
केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने भी इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि उनके संज्ञान में प्रशासनिक लापरवाही की बात आई है। उन्होंने कहा कि यदि ग्रामीणों ने नाव की मांग की थी और प्रशासन ने व्यवस्था नहीं की, तो यह गंभीर लापरवाही है। दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की बात भी उन्होंने कही थी।
13 बच्चों की मौत, छह लोगों को NMCH में भर्ती कराया गया
प्रशासन के अनुसार, राघोपुर प्रखंड की रामपुर श्यामचंद पंचायत में निजी नाव डूबने की घटना में 13 बच्चों की मौत हुई। मृतकों में नौ बच्चियां और चार बच्चे शामिल हैं। हादसे के बाद छह लोगों को बेहतर इलाज के लिए पटना स्थित नालंदा मेडिकल कॉलेज अस्पताल (NMCH) भेजा गया। इनमें चार बच्चे और दो वयस्क शामिल हैं। स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार ने अस्पताल पहुंचकर बचाए गए बच्चों से मुलाकात की और दिवंगत लोगों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की। उन्होंने बताया कि घटना की जांच के आदेश दिए गए हैं।
CO और थानाध्यक्ष से स्पष्टीकरण, वेतन पर रोक
हादसे के बाद जिला प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था में संभावित लापरवाही को लेकर राघोपुर के अंचलाधिकारी (CO) और थानाध्यक्ष से स्पष्टीकरण मांगा है। साथ ही, अगले आदेश तक दोनों अधिकारियों के वेतन भुगतान पर रोक लगाने की कार्रवाई की गई है।
जिला पदाधिकारी वर्षा सिंह घटनास्थल पर पहुंचीं और राहत एवं बचाव अभियान का जायजा लिया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को बचाव कार्य में तेजी लाने और प्रभावित लोगों को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। घटनास्थल पर एसडीआरएफ की टीमें राहत और बचाव अभियान में जुटी रहीं।
मृतक परिवारों को 6.23 लाख रुपये तक सहायता
जिला प्रशासन के अनुसार, राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं के तहत प्रत्येक मृतक परिवार को कुल 4 लाख 23 हजार रुपये की तत्काल सहायता दी गई है। इसमें आपदा अनुग्रह अनुदान के चार लाख रुपये, कबीर अंत्येष्टि योजना के तीन हजार रुपये और मुख्यमंत्री पारिवारिक लाभ योजना के 20 हजार रुपये शामिल हैं।
इसके अतिरिक्त, प्रधानमंत्री राहत कोष से प्रत्येक मृतक के परिजनों को दो लाख रुपये की सहायता देने की घोषणा की गई है। हादसे में घायल या इलाज करा रहे प्रत्येक व्यक्ति को 50 हजार रुपये की सहायता देने की भी घोषणा की गई है।
यदि घोषित सहायता पूरी तरह प्रदान की जाती है, तो राज्य सरकार की सहायता और प्रधानमंत्री राहत कोष की राशि मिलाकर प्रत्येक मृतक परिवार को कुल 6 लाख 23 हजार रुपये मिलेंगे।
राघोपुर पहुंचे नेता, सुरक्षा व्यवस्था पर जवाबदेही की मांग
नाव हादसे के बाद राघोपुर में राजनीतिक नेताओं के पहुंचने का सिलसिला भी जारी रहा। केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने पीड़ित परिवारों से मुलाकात की। तेजस्वी यादव के भी क्षेत्र का दौरा करने का कार्यक्रम बताया गया। इसके अलावा उपमुख्यमंत्री बिजेंद्र यादव, मंत्री रामकृपाल यादव और सांसद पप्पू यादव समेत अन्य नेताओं के पहुंचने की जानकारी दी गई।
हादसे के बाद स्थानीय लोगों में नाराजगी है। लोग नाव की सुरक्षा, प्रशासनिक व्यवस्था और जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी को लेकर सवाल उठा रहे हैं। 13 बच्चों की मौत के बाद अब सबसे अहम सवाल यह है कि नाव हादसा किन परिस्थितियों में हुआ, सुरक्षा इंतजामों में कोई चूक हुई थी या नहीं और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे। इन सवालों के जवाब जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होंगे।


