
पटना: बिहार में राजस्व अधिकारियों और सरकार के बीच जारी विवाद के बीच आम लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है। मुजफ्फरपुर के मुशहरी प्रकरण में सरकार से मिले आश्वासन के बाद राजस्व अधिकारियों ने जाति, आय और निवास प्रमाणपत्र बनाने का काम फिर से शुरू करने का निर्णय लिया है। इससे आरटीपीएस सेवाएं पहले की तरह बहाल हो सकेंगी।

बिहार राजस्व सेवा संघ (BIRSA) के अनुसार, गृह विभाग और राजस्व विभाग की ओर से स्पष्ट मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) जारी होने तक दाखिल-खारिज, परिमार्जन प्लस और संबंधित राजस्व कार्यों में डोंगल का इस्तेमाल स्थगित रखने पर सहमति बनी है।

इस फैसले से टीआरई-4, लाइब्रेरियन और अन्य आगामी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों को राहत मिल सकती है। जाति, आय, आवास, नॉन-क्रीमी लेयर और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) प्रमाणपत्रों के लिए आवेदन करने वालों को भी सेवाएं दोबारा शुरू होने का लाभ मिलेगा।
अधिकारियों की गिरफ्तारी के बाद शुरू हुआ था विवाद
मुजफ्फरपुर के मुशहरी प्रकरण में अंचल अधिकारी महेंद्र शुक्ला और राजस्व अधिकारी करुण करण की गिरफ्तारी के बाद राजस्व अधिकारियों और सरकार के बीच विवाद गहरा गया था। इसके बाद प्रमाणपत्र जारी करने सहित कई राजस्व कार्य प्रभावित हुए थे।
संघ के मुताबिक, सरकार के साथ उच्चस्तरीय वार्ता में प्राथमिकी दर्ज करने और गिरफ्तारी की प्रक्रिया पर पुनर्विचार करने का आश्वासन दिया गया है। इस संबंध में विस्तृत SOP जारी करने की बात भी कही गई है।
इसके अलावा, संबंधित प्राथमिकी को निरस्त कराने के लिए आवश्यक कानूनी पहल करने का भरोसा भी सरकार की ओर से दिया गया है। संघ का कहना है कि इन आश्वासनों के बाद प्रमाणपत्र बनाने का काम दोबारा शुरू करने का निर्णय लिया गया है।
अधिकारियों पर कार्रवाई के नियम हों स्पष्ट
बिहार राजस्व सेवा संघ चाहता है कि गृह विभाग और विभागीय विधि प्रभाग अर्ध-न्यायिक राजस्व कार्यों के दौरान अधिकारियों को मिलने वाले कानूनी संरक्षण को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करें।
संघ ने यह भी स्पष्ट करने की मांग की है कि किसी अधिकारी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने या गिरफ्तारी से पहले किन परिस्थितियों में सक्षम प्राधिकार की स्वीकृति आवश्यक होगी।
हालांकि, संघ ने भ्रष्टाचार के मामलों में निष्पक्ष जांच और नियमानुसार कार्रवाई का समर्थन किया है। उसका कहना है कि यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी के खिलाफ भ्रष्टाचार के ठोस साक्ष्य मिलते हैं, तो सक्षम एजेंसियों को जांच, प्राथमिकी, अभियोजन और अन्य जरूरी कार्रवाई करनी चाहिए।
दाखिल-खारिज और परिमार्जन प्लस के लिए स्पष्ट SOP की मांग
संघ ने दाखिल-खारिज और परिमार्जन प्लस की प्रक्रिया के लिए विस्तृत SOP जारी करने की मांग भी उठाई है। इसके पीछे एक प्रमुख वजह कई स्थानों पर रजिस्टर-2 की जमाबंदियों का क्षतिग्रस्त, पुराना या त्रुटिपूर्ण होना बताया गया है।
संघ के अनुसार, ऐसे मामलों में वास्तविक स्थिति का सत्यापन किए बिना केवल लक्ष्य पूरा करने का दबाव भविष्य में भूमि विवादों को बढ़ा सकता है। इसलिए प्रस्तावित SOP में कई बिंदुओं पर स्पष्ट दिशा-निर्देश होने चाहिए:
- भूमि अभिलेखों का सत्यापन।
- जरूरत के अनुसार स्थल निरीक्षण।
- विवादित जमाबंदियों के निष्पादन की प्रक्रिया।
- अभिलेखों में मौजूद त्रुटियों को सुधारने के नियम।
- संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी और जवाबदेही।
रिकॉर्ड ऑफ राइट्स को समयबद्ध तरीके से तैयार करने की मांग
बिहार राजस्व सेवा संघ ने राज्य में पूर्ण, अद्यतन और प्रमाणिक अधिकार अभिलेख यानी रिकॉर्ड ऑफ राइट्स तैयार करने की प्रक्रिया को भी समयबद्ध करने की मांग की है।
संघ का मानना है कि भूमि अभिलेखों को दुरुस्त करने और राजस्व संबंधी प्रक्रियाओं के लिए स्पष्ट नियम बनाने से अधिकारियों को काम करने में आसानी होगी। साथ ही, जमीन से जुड़े विवादों और अभिलेखों में गड़बड़ी की आशंका को कम करने में भी मदद मिल सकती है।
फिलहाल, सरकार की ओर से मिले आश्वासनों के बाद प्रमाणपत्र सेवाएं फिर शुरू करने का निर्णय लिया गया है। अब गृह और राजस्व विभाग की ओर से स्पष्ट SOP जारी होने तथा उसके क्रियान्वयन पर आगे की स्थिति निर्भर करेगी।


