
Koderma : कोडरमा में आदिवासी नाबालिग लड़की के कथित यौन शोषण मामले में गिरफ्तार सिविल सर्जन डॉ. अनिल कुमार से जुड़े केस में नया मोड़ आया है। दो दिन पहले मेडिकल जांच कराने से मना करने वाली पीड़िता बुधवार को सदर अस्पताल पहुंची, जहां पांच विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने करीब पांच घंटे तक उसकी मेडिकल जांच की। हालांकि, जांच की रिपोर्ट में क्या आया है, इस बारे में स्वास्थ्य विभाग या पुलिस की ओर से कोई आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की गई है।

पांच डॉक्टरों की विशेष टीम ने की जांच
बुधवार दोपहर बाद महिला थाना प्रभारी सह केस की आईओ (अनुसंधानकर्ता) हेमा कुमारी पुलिस टीम के साथ पीड़िता को लेकर सदर अस्पताल पहुंची थीं। पीड़िता के मेडिकल परीक्षण के लिए गठित बोर्ड में दो महिला रोग विशेषज्ञ (गाइनेकोलॉजिस्ट), एक डेंटिस्ट, एक ऑर्थोपेडिक सर्जन और एक प्राइवेट रेडियोलॉजिस्ट को शामिल किया गया था। डॉक्टरों की टीम ने जरूरी चिकित्सकीय प्रक्रियाएं पूरी कीं। शुरुआती इनकार के बाद परिजनों और ग्रामीणों के समझाने पर पीड़िता जांच के लिए राजी हुई, जिसके बाद यह मेडिकल प्रक्रिया पूरी हो सकी।

हजारीबाग CWC के सामने दर्ज हुए थे बयान
पीड़िता मूल रूप से हजारीबाग जिले के विशुनगढ़ थाना इलाके की रहने वाली है। उसने हजारीबाग बाल कल्याण समिति (CWC) के सामने दिए बयान और लिखित आवेदन में सिविल सर्जन डॉ. अनिल कुमार पर पिछले दो महीनों में तीन बार यौन शोषण करने का आरोप लगाया था। इसी शिकायत के आधार पर कोडरमा महिला थाने में पोक्सो और संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर सिविल सर्जन को गिरफ्तार किया गया था। बुधवार को अस्पताल परिसर में पीड़िता द्वारा कुछ और आरोप लगाए जाने की बातें भी सामने आई हैं, जिनकी पुलिस गहनता से पुष्टि कर रही है।
साक्ष्यों के मिलान में जुटी पुलिस
पुलिस ने शुरुआत में ही मामले से जुड़े तकनीकी साक्ष्य जुटाने की बात कही थी। अब मेडिकल जांच पूरी होने के बाद पुलिस के सामने पीड़िता के बयानों, तकनीकी डेटा और मेडिकल रिपोर्ट का मिलान कर ठोस चार्जशीट तैयार करने की चुनौती है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि हर पहलू की सूक्ष्मता से जांच की जा रही है ताकि कानूनी प्रक्रिया पूरी मजबूती से आगे बढ़ सके।
शालिनी गुप्ता ने एसपी से मिलकर की निष्पक्ष जांच की मांग
इधर, मामले को लेकर पूर्व जिला परिषद अध्यक्ष और झामुमो नेत्री शालिनी गुप्ता ने बुधवार को कोडरमा एसपी कुमार शिवाशीष से मुलाकात कर एक ज्ञापन सौंपा। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष, पारदर्शी और तय समय में जांच कराने की मांग की। शालिनी गुप्ता ने कहा कि यह मामला कानून के राज और महिला सुरक्षा से जुड़ा है। उन्होंने डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखने, पीड़िता की पहचान की गोपनीयता बनाए रखने और जांच को किसी भी बाहरी दबाव से पूरी तरह मुक्त रखने पर जोर दिया। उनका कहना था कि जांच ऐसी हो जिससे किसी निर्दोष के साथ अन्याय न हो और दोषी को कानून के मुताबिक कड़ी सजा मिले।


