
Ranchi bad roads: झारखंड HC ने रांची शहर के मुख्य मार्गों को छोड़कर बाकी अंदरूनी इलाकों की खस्ताहाल और जर्जर सड़कों की स्थिति पर कड़ा रुख अपनाते हुए राज्य सरकार से जवाब तलब किया है। मुख्य न्यायाधीश एमएस सोनक और न्यायमूर्ति मनोज प्रसाद की खंडपीठ ने सरकार को निर्देश दिया है कि अदालत द्वारा पूर्व में दिए गए आदेशों के आलोक में अब तक हुए कार्यों की अद्यतन जानकारी पेश की जाए। कोर्ट ने सरकार को स्पष्ट रूप से शपथपत्र दाखिल कर यह बताने को कहा है कि सड़कों को दुरुस्त करने का कितना काम पूरा हो चुका है और कितना काम अभी बाकी है। अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 17 दिसंबर की तारीख तय की है।

गड्ढों और बदहाल ड्रेनेज से खतरे में आम राहगीर, PIL में उठाए गए सवाल
यह मामला प्रार्थी शुभक कटारूका की ओर से दायर एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई के दौरान सामने आया, जिसमें राजधानी के विभिन्न मार्गों की दयनीय स्थिति का मुद्दा उठाया गया है। अदालत में प्रार्थी का पक्ष रखते हुए बताया गया कि मुख्य सड़कों के अलावा शहर के मोहल्लों और रिहायशी इलाकों की सड़कें गड्ढों में तब्दील हो चुकी हैं, जिससे आए दिन लोग हादसों का शिकार हो रहे हैं। इसके साथ ही सड़कों के किनारे नालियों की समुचित व्यवस्था न होने के कारण हल्की बारिश में भी जल निकासी ठप हो जाती है और सड़कों पर गंदा पानी जमा रहता है।

सेवा सदन पथ समेत कई इलाकों की सड़कों को दुरुस्त करने की मांग
याचिका में अदालत से विशेष रूप से आग्रह किया गया है कि सेवा सदन पथ समेत शहर के तमाम उपेक्षित इलाकों की सड़कों का तत्काल पुनर्निर्माण कराया जाए और नालियों के ड्रेनेज सिस्टम को ठीक किया जाए। सड़कों पर जलभराव और गड्ढों के कारण स्थानीय निवासियों, मरीजों और राहगीरों को रोजाना नारकीय स्थिति का सामना करना पड़ रहा है। अब 17 दिसंबर को होने वाली अगली सुनवाई में यह साफ होगा कि हाईकोर्ट के सख्त निर्देशों के बाद नगर निगम और संबंधित विभाग ने जमीनी स्तर पर क्या सुधार किए हैं।


