
Jharkhand High Court: झारखंड हाईकोर्ट ने एक छह वर्षीय बच्ची से जुड़े संवेदनशील पॉक्सो (POCSO) मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे मुजरिम सुशील एक्का को बड़ी राहत दी है। अदालत ने मामले से जुड़ी मेडिकल रिपोर्ट, गवाहों के बयानों और प्राथमिकी (FIR) दर्ज होने में हुई दो दिन की देरी को ध्यान में रखते हुए अपील लंबित रहने तक आरोपी को जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया है। इससे पहले निचली अदालत ने मामले की सुनवाई करते हुए सुशील एक्का को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी।

बचाव पक्ष की दलील: आपसी विवाद और FIR में देरी
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने अदालत के समक्ष दलील दी कि कथित घटना की तारीख 3 मई 2025 बताई गई थी, जबकि प्राथमिकी इसके दो दिन बाद यानी 5 मई को दर्ज कराई गई। इसके अलावा गवाहियों के दौरान यह तथ्य भी सामने आया कि घटना वाले दिन शिकायतकर्ता महिला और आरोपी के बीच किसी बात को लेकर तीखी बहस हुई थी। बचाव पक्ष का तर्क था कि इस पुराने विवाद और आपसी रंजिश के चलते झूठा मामला दर्ज कराए जाने की आशंका से पूरी तरह इनकार नहीं किया जा सकता।

सरकारी विरोध के बावजूद अदालत से मिली राहत
अदालत की खंडपीठ ने मामले से जुड़े गवाहों के बयानों और मेडिकल रिपोर्ट के विभिन्न पहलुओं की बारीकी से समीक्षा की। हालांकि, सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से आरोपी की जमानत याचिका का कड़ा विरोध किया गया, लेकिन अदालत ने पूरे घटनाक्रम और परिस्थितियों को देखते हुए आरोपी को राहत देने का फैसला किया।
मुचलका और स्थानीय जमानतदार पेश करने की शर्त
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि आरोपी को 10 हजार रुपये का निजी मुचलका और इतनी ही राशि के दो स्थानीय जमानतदार ट्रायल कोर्ट के समक्ष पेश करने होंगे। इन कानूनी औपचारिकताओं के पूरा होने के बाद ही आरोपी की जेल से रिहाई संभव हो सकेगी।


