
Ranchi: झारखंड हाईकोर्ट ने 17 साल पुराने एक चर्चित हत्याकांड में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए निचली अदालत के आदेश को पलट दिया है। अदालत ने पर्याप्त साक्ष्यों और ठोस गवाही के अभाव में उम्रकैद की सजा काट रहे अभियुक्त मो. खलील को सभी आरोपों से बरी कर दिया है। साल 2009 के इस मामले में हजारीबाग की निचली अदालत ने मो. खलील को दोषी करार देते हुए उम्रकैद और सात साल की सजा सुनाई थी, जिसे अब हाईकोर्ट ने पूरी तरह निरस्त कर दिया है।

प्रत्यक्षदर्शी का अभाव और होटल संचालक का इनकार
मामले की सुनवाई के दौरान यह बात सामने आई कि घटना का कोई भी चश्मदीद गवाह मौजूद नहीं था और पूरा अभियोजन केवल परिस्थितिजन्य साक्ष्यों (Circumstantial Evidence) पर टिका हुआ था। पुलिस ने जिस होटल के एंट्री रजिस्टर को आरोपी की घटनास्थल के पास मौजूदगी का मुख्य आधार बनाया था, अदालत में उस होटल के संचालक ने आरोपी की पहचान करने से साफ इनकार कर दिया। इसके साथ ही अदालत ने पाया कि ड्यूटी के समय को लेकर पुलिस और निचली अदालत का निष्कर्ष ठोस तथ्यों के बजाय केवल अनुमानों पर आधारित था।

घटनास्थल और बरामद सामान पर उठे सवाल
हाईकोर्ट की खंडपीठ ने मृतका के पास से मिले सामान और घटनास्थल की स्थिति को लेकर पेश किए गए दावों पर भी गंभीर सवाल उठाए। अदालत ने स्पष्ट किया कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ हत्या का कोई स्पष्ट मकसद (Motive) या उसकी सीधी संलिप्तता साबित करने में पूरी तरह विफल रहा है।
निचली अदालत का फैसला रद्द, बेल बॉन्ड से मुक्त
केस के सभी पहलुओं और कानूनी बिंदुओं की बारीकी से समीक्षा करने के बाद हाईकोर्ट ने माना कि केवल संदेह या कयासों के आधार पर किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। अदालत ने निचली अदालत द्वारा सुनाई गई उम्रकैद की सजा को रद्द करते हुए मो. खलील को तुरंत रिहा करने और उसके जमानत बंधपत्र (बेल बॉन्ड) को निरस्त करने का आदेश दिया।


