
Kolkata : पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में दुर्गा पूजा के उत्सव के बीच शनिवार, 17 अक्टूबर को एक दर्दनाक हादसा हो गया. उत्तर कोलकाता के चोरबागान सार्वजनिक दुर्गा पूजा पंडाल में मची भगदड़ में कई लोगों की जान चली गई, जबकि कई अन्य घायल हो गए. हादसे के बाद घटनास्थल पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया और राहत-बचाव कार्य शुरू किया गया.

बारिश और भीड़ के बीच बिगड़े हालात
प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, यह घटना शाम करीब 7:40 बजे गिरिश पार्क थाना क्षेत्र में स्थित चोरबागान के पूजा पंडाल के निकास द्वार के पास हुई. उस समय पंडाल में दर्शन के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचे थे. बारिश के बीच भीड़ बढ़ने से स्थिति बेकाबू हो गई और भगदड़ मच गई. हादसे में घायल लोगों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया. पुलिस के मुताबिक, घायलों को मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में भर्ती कराया गया. राहत कार्य में पुलिस, दमकल विभाग, आपदा प्रबंधन दल और एंबुलेंस की मदद ली गई.

मुख्यमंत्री ने अस्पताल पहुंचकर लिया जायजा
हादसे की जानकारी मिलते ही पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी, स्वास्थ्य मंत्री शरद्वत मुखर्जी और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी अस्पताल पहुंचे. उन्होंने घायलों की स्थिति की जानकारी ली और प्रभावित लोगों को आवश्यक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए. मुख्यमंत्री ने मृतकों के परिजनों को 25 लाख रुपये की आर्थिक सहायता और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की घोषणा की. घायलों को भी पांच लाख रुपये की सहायता देने की बात कही गई.
प्रधानमंत्री ने जताया दुख
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोलकाता की घटना पर दुख व्यक्त किया. उन्होंने मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना जताते हुए घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना की. प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से मृतकों के परिजनों को दो-दो लाख रुपये और घायलों को 50-50 हजार रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की गई. पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी हादसे पर दुख जताया और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना की.
जांच और जवाबदेही पर सवाल
इस घटना के बाद पूजा पंडाल में भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे हैं. मुख्यमंत्री ने मामले की जांच कराने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई का आश्वासन दिया. आयोजक समिति से जुड़े कुछ लोगों को हिरासत में लिए जाने की भी खबर है. त्योहार के दौरान हुई इस त्रासदी ने सुरक्षा इंतजामों और बड़ी संख्या में जुटने वाली भीड़ को नियंत्रित करने की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.


