
Ranchi: झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव आलोक कुमार दूबे ने भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (BDL) द्वारा 300 ऑप्टिकल साइट्स की खरीद के लिए जारी की गई एकल निविदा (सिंगल टेंडर) को लेकर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार और रक्षा मंत्रालय पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा कोई निजी कारोबार नहीं है, बल्कि यह देश के 140 करोड़ नागरिकों की सुरक्षा और सीमा पर तैनात सैनिकों के जीवन से जुड़ा बेहद संवेदनशील मामला है। ऐसे मामलों में पारदर्शिता, जवाबदेही और निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा से किसी भी सूरत में समझौता नहीं किया जा सकता।

खोजी रिपोर्ट का हवाला और हितों के टकराव का आरोप
आलोक कुमार दूबे ने ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की एक खोजी रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि BDL ने 300 ऑप्टिकल साइट्स की खरीद के लिए ‘ऐंद्री डिफेंस एडवाइजरी प्राइवेट लिमिटेड’ को सिंगल टेंडर जारी किया, जिसने ₹56.8 करोड़ की बोली लगाई है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस कंपनी के संस्थापकों में BDL के पूर्व चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक (CMD) सिद्धार्थ मिश्रा और उनकी पत्नी शामिल हैं। कांग्रेस नेता ने कहा कि पूर्व सीएमडी से जुड़ी कंपनी को बिना किसी खुली प्रतिस्पर्धा के सीधे अवसर देना रक्षा खरीद की निष्पक्षता और गंभीर हितों के टकराव (कॉन्फ्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट) की ओर इशारा करता है।

प्रतिस्पर्धात्मक प्रक्रिया छोड़कर सिंगल टेंडर क्यों?
कांग्रेस महासचिव ने सरकार से सवाल किया कि जब वर्ष 2024 और 2025 में इसी प्रकार के उपकरणों की खरीद खुली व प्रतिस्पर्धी निविदा प्रक्रिया के जरिए की गई थी, तो 2026 में अचानक एकल निविदा अपनाने की नौबत क्यों आई। उन्होंने पूछा कि आखिर ऐसी कौन-सी आपात स्थिति आ गई थी कि नियमों को ताक पर रखकर एक निजी कंपनी को सीधे टेंडर दिया गया। क्या रक्षा खरीद व्यवस्था में तय नियमों से ऊपर किसी व्यक्ति विशेष का रसूख हो सकता है, इसका जवाब केंद्र सरकार और रक्षा मंत्रालय को देश के सामने रखना चाहिए।
कंपनी की क्षमता और वित्तीय स्थिति पर सवाल
आलोक दूबे ने कंपनी के वित्तीय ट्रैक रिकॉर्ड पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार कंपनी ने वित्त वर्ष 2024-25 में मात्र ₹44.43 लाख का राजस्व और ₹2.89 लाख का लाभ दर्ज किया था, जबकि प्रस्तावित खरीद की बोली ₹56.8 करोड़ की है। टेंडर में कम-से-कम 15 वर्षों तक तकनीकी सहायता और रखरखाव की अनिवार्य शर्त रखी गई है। ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि सीमित वित्तीय आधार वाली कंपनी इतने बड़े सौदे की तकनीकी आपूर्ति और दीर्घकालिक रखरखाव की जिम्मेदारी किस तरह पूरी करेगी।
सच्चा राष्ट्रवाद जवाबदेही में है, भाषणों में नहीं
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रक्षा मंत्री पर निशाना साधते हुए आलोक दूबे ने कहा कि राष्ट्रवाद केवल भाषणों, नारों और प्रचार का माध्यम नहीं हो सकता। सच्चा राष्ट्रवाद सेना को आधुनिक संसाधन उपलब्ध कराने, सैनिकों के हितों की रक्षा करने और सरकारी संस्थानों में ईमानदारी बरतने से साबित होता है। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि BDL की इस निविदा प्रक्रिया, एकल निविदा के औचित्य, मूल्य निर्धारण और हितों के टकराव से जुड़े सभी नियमों के अनुपालन की एक स्वतंत्र व निष्पक्ष समीक्षा कराई जाए, ताकि देश की रक्षा खरीद व्यवस्था पर उठ रहे सवालों का पटाक्षेप हो सके।


