
Defection Politics: वरिष्ठ वकील और राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने राजनीति में चल रही खरीद-फरोख्त और जोड़-तोड़ की राजनीति पर तीखा हमला बोला है। केरल के कोच्चि में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने साफ-साफ कहा कि चुनाव जीतने के बाद पाला बदलने वाले सांसदों और विधायकों पर कड़ा प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए। उन्होंने संविधान की 10वीं अनुसूची यानी एंटी-डिफेक्शन लॉ की कमियों पर सवाल उठाते हुए इसमें जल्द से जल्द बदलाव करने की जोरदार वकालत की है।

विलय के नाम पर हो रहा खेल, दो-तिहाई बहुमत वाले नियम पर उठाए सवाल
सिब्बल का कहना है कि मौजूदा कानून में एक बहुत बड़ा झोल है। इसके तहत अगर किसी पार्टी के दो-तिहाई विधायक या सांसद रातों-रात दूसरी पार्टी में चले जाते हैं, तो उसे दलबदल नहीं माना जाता बल्कि ‘विलय’ का नाम दे दिया जाता है। इसी कानूनी खामी का फायदा उठाकर नेता लोग अपनी सुविधा के हिसाब से दल बदलते रहते हैं और उनकी सदस्यता भी नहीं जाती। उनका मानना है कि इस रास्ते को पूरी तरह बंद करना अब वक्त की सबसे बड़ी मांग है ताकि जनता के वोटों की इज्जत बची रहे।

कॉकरोच जनता पार्टी का खुला समर्थन, नेताओं ने की सख्त कानून की मांग
कपिल सिब्बल के इस बेबाक बयान के बाद राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ यानी कॉजपा ने आगे आकर इस प्रस्ताव का खुलकर समर्थन किया है। पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अभिजीत दीपके ने कहा कि इस तरह के प्रस्ताव का जमीन पर उतरना बेहद जरूरी है। वहीं कॉजपा के सह-संयोजक सौरव दास ने भी इसका स्वागत करते हुए कहा कि किसी एक पार्टी के चुनाव चिह्न पर जीतकर बाद में पैसे या किसी भी दबाव में आकर दूसरी पार्टी में शामिल होने वाले हर नेता पर हमेशा के लिए रोक लगनी चाहिए।


