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BRICS सम्मेलन की सफलता देख हैरान हुआ अमेरिका, विश्लेषक ने माना भारत की कूटनीति का लोहा

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Brics Summit 2026: नई दिल्ली में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की शानदार सफलता के बाद अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की कूटनीति की जमकर तारीफ हो रही है। अमेरिका के जाने-माने विदेशी मामलों के विश्लेषक और ‘अटलांटिक काउंसिल’ के सीनियर फेलो माइकल कुगेलमैन ने कहा है कि भारत ने इस सम्मेलन की बहुत ही बेहतरीन तरीके से मेज़बानी की है। उन्होंने माना कि सम्मेलन के पहले ही दिन सर्वसम्मति से साझा घोषणापत्र जारी करवा लेना यह साबित करता है कि अलग-अलग सोच और अलग राय रखने वाले देशों को एक साथ लाने और उनमें आम सहमति बनाने में भारत की क्षमता कितनी जबरदस्त है।

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ईरान और यूएई का मनमुटाव कराया खत्म, दुनिया की आधी आबादी की बना आवाज

12 और 13 सितंबर को आयोजित हुए इस बड़े आयोजन में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग समेत दुनिया के कई दिग्गज नेता शामिल हुए थे। बातचीत के दौरान जब पश्चिम एशिया के तनाव को लेकर ईरान और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के बीच मतभेद सामने आए, तो भारत ने बीच में आकर बहुत ही सूझबूझ से उन दूरियों को मिटाया। इस बैठक में मंजूर किए गए ‘नई दिल्ली घोषणापत्र 2026’ में मनमाने टैक्स और व्यापार में रुकावट डालने वाले नियमों पर चिंता जताई गई, साथ ही आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई और विवादों को बातचीत से सुलझाने पर जोर दिया गया। आपको बता दें कि 11 देशों वाले इस ब्रिक्स समूह में दुनिया की करीब 49.5 प्रतिशत आबादी रहती है और यह वैश्विक अर्थव्यवस्था में 40 प्रतिशत की बड़ी हिस्सेदारी रखता है।

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‘ब्रिक्स को लेकर अमेरिका में फैली है गलतफहमी’, कुगेलमैन ने किया बड़ा खुलासा

ब्रिक्स को लेकर अमेरिका के रुख पर बात करते हुए माइकल कुगेलमैन ने साफ कहा कि अमेरिका में इस संगठन को अक्सर गलत नजरिए से देखा जाता है। वहां कुछ लोग इसे सिर्फ बेअसर बातचीत का अड्डा समझते हैं, तो कुछ को लगता है कि यह पश्चिमी देशों का मुकाबला करने के लिए बनाया गया कोई गुट है। कुगेलमैन के मुताबिक ये दोनों ही सोच पूरी तरह गलत हैं। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स सौ फीसदी एकराय होने के बजाय आम सहमति के आधार पर काम करता है, और भारत ने यह साबित कर दिखाया है कि वह सबको एक साथ लेकर आगे बढ़ सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि इस घोषणापत्र में अमेरिका का नाम नहीं लिया गया है, इसलिए अमेरिकी प्रशासन की तरफ से भी कोई तीखी प्रतिक्रिया आने की उम्मीद नहीं है।

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