
बिहार में Social Science Research को मजबूत करने और राज्य में बेहतर रिसर्च का माहौल तैयार करने की दिशा में नई पहल की तैयारी है। स्विस नेशनल साइंस फाउंडेशन (SNSF) और इंडियन काउंसिल ऑफ सोशल साइंस रिसर्च (ICSSR) ने बिहार सरकार के साथ मिलकर सोशल साइंस रिसर्च को बढ़ावा देने का प्रस्ताव रखा है।

इस प्रस्ताव को लेकर मुख्यमंत्री के सरकारी आवास पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में बैठक हुई। बैठक में SNSF के पूर्व प्रतिनिधि मैक्स बर्गमैन और ज़िनेट बर्गमैन, ICSSR के सदस्य सचिव धनंजय सिंह और विधान परिषद सदस्य नीरज कुमार मौजूद रहे।

रिसर्च कल्चर मजबूत करने पर जोर
मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से जारी बयान के मुताबिक, SNSF और ICSSR के प्रतिनिधियों ने बिहार सरकार के साथ मिलकर राज्य में रिसर्च कल्चर को मजबूत करने की इच्छा जताई। इसके तहत सोशल साइंस के क्षेत्र में नए शोध अवसर विकसित करने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अकादमिक एक्सचेंज बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि मौजूदा समय में सोशल साइंस रिसर्च की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। इसके जरिए समाज की जरूरतों को बेहतर तरीके से समझा जा सकता है। साथ ही कल्याणकारी योजनाओं को प्रभावी बनाने और नीतियां तैयार करने में भी शोध से मदद मिल सकती है।
Bihar Social Science Research: शिक्षा और स्किल डेवलपमेंट को भी मिलेगा फायदा
सम्राट चौधरी ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने, स्किल डेवलपमेंट को बढ़ावा देने और बिहार में रिसर्च का माहौल तैयार करने के लिए अंतरराष्ट्रीय संस्थानों और विश्वविद्यालयों का सहयोग जरूरी है।
उन्होंने कहा कि सोशल साइंस और विज्ञान की दूसरी शाखाओं के बीच बेहतर समन्वय से रिसर्च के नए तरीके विकसित किए जा सकते हैं। मुख्यमंत्री ने SNSF और ICSSR के प्रतिनिधियों से बिहार में अपनी रिसर्च और अकादमिक गतिविधियों का विस्तार करने का आग्रह भी किया।
‘विकसित भारत’ और ‘समृद्ध बिहार’ के लक्ष्य से जोड़ा
मुख्यमंत्री ने उम्मीद जताई कि SNSF और ICSSR के साथ प्रस्तावित सहयोग से बिहार में शोध और अकादमिक गतिविधियों को नई दिशा मिलेगी। उन्होंने कहा कि रिसर्च, शिक्षा और अंतरराष्ट्रीय अकादमिक सहयोग को बढ़ावा देना ‘विकसित भारत’ और ‘समृद्ध बिहार’ के लक्ष्य को हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
इस पहल से बिहार के विश्वविद्यालयों, शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग और अकादमिक आदान-प्रदान के नए अवसर विकसित होने की उम्मीद है।


