
नई दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू व विवेक जोशी के बीच शनिवार को महत्वपूर्ण बैठक हुई। बैठक के बाद चुनाव आयोग ने विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR, मतदाता सूची और आयोग के आंतरिक कामकाज को लेकर कई बिंदुओं पर स्पष्टीकरण जारी किया। यह बैठक ऐसे समय हुई है जब पिछले दिनों दोनों चुनाव आयुक्तों की ओर से कुछ फैसलों पर आपत्तियों को लेकर रिपोर्ट सामने आई थी।

चुनाव आयोग ने कहा कि किसी बहुसदस्यीय संवैधानिक संस्था में विचार-विमर्श, सुझाव और आपत्तियां सामने आना सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है। आयोग के मुताबिक SIR और तकनीक से जुड़े सभी अंतिम फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी और सर्वसम्मति से लिए गए हैं।

SIR और वोटर लिस्ट को लेकर क्या कहा आयोग ने?
आयोग ने स्पष्ट किया कि SIR के दौरान फॉर्म-6 के साथ दिए जाने वाले घोषणा पत्र को लेकर सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप प्रक्रिया अपनाई जा रही है। वहीं, SIR के तहत नोटिस पाने वाले लोगों को सामान्य परिस्थितियों में व्यक्तिगत सुनवाई के लिए उपस्थित होने की जरूरत नहीं होगी। केवल असाधारण मामलों में व्यक्तिगत उपस्थिति की आवश्यकता पड़ सकती है।
आयोग ने यह भी कहा कि बिहार और पश्चिम बंगाल समेत 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में SIR का काम पूरा हो चुका है। यदि SIR के दौरान या उसके बाद किसी पात्र व्यक्ति का नाम मतदाता सूची में छूट गया है या कोई नया मतदाता पहली बार वोट देने के योग्य हुआ है, तो वह निरंतर अपडेट की प्रक्रिया के तहत संबंधित निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी के पास आवेदन कर सकता है। आयोग ने मुख्य निर्वाचन अधिकारियों, जिला निर्वाचन अधिकारियों और EROs को ऐसे छूटे हुए मतदाताओं के नाम जोड़ने के लिए विशेष अभियान चलाने का निर्देश दिया है।
गोवा में 97 में से 81 लोगों ने फॉर्म-6 भरा
गोवा को लेकर आयोग ने बताया कि संबंधित बूथ लेवल अधिकारियों को छूटे हुए मतदाताओं के घर जाकर फॉर्म उपलब्ध कराने और आवेदन की प्रक्रिया में मदद करने के निर्देश दिए गए हैं। आयोग के अनुसार 97 में से 81 लोगों ने मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के लिए फॉर्म-6 भर दिया है। इससे पहले गोवा में पात्र पाए गए कुछ मतदाताओं के नाम जोड़ने से जुड़े तकनीकी मुद्दों को लेकर भी सवाल उठे थे।
कैबिनेट सचिव को पत्र और IT डिवीजन पर भी सफाई
चुनाव आयोग ने कैबिनेट सचिव को भेजे गए पत्र को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की। आयोग के मुताबिक यह पत्र किसी नीति संबंधी मामले या IT डिवीजन से जुड़ा नहीं था, बल्कि ECI में प्रतिनियुक्ति पर आए एक अधिकारी के कामकाज से संबंधित था।
आयोग ने कहा कि संबंधित अधिकारी की ओर से जारी किए गए काम के बंटवारे के आदेश दो चुनाव आयुक्तों के आदेशों के बाद लागू नहीं किए गए थे। आयोग के मुताबिक IT डिवीजन की निगरानी का अधिकार भी वापस नहीं लिया गया था।
दिल्ली और महाराष्ट्र में बढ़ी दावे-आपत्तियों की समयसीमा
आयोग ने दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के अनुरोध पर दावे और आपत्तियां दाखिल करने की अंतिम तारीख बढ़ाकर 30 अक्टूबर 2026 कर दी है। वहीं, नोटिस तथा दावे-आपत्तियों के निपटारे की समयसीमा 30 नवंबर 2026 तक बढ़ाई गई है। महाराष्ट्र में भी दावे और आपत्तियां दाखिल करने की समयसीमा 12 अक्टूबर 2026 तक बढ़ाई गई है, जबकि नोटिस और दावे-आपत्तियों के निपटारे की अंतिम तारीख 10 नवंबर 2026 तय की गई है।
चुनाव आयोग का यह स्पष्टीकरण ऐसे समय आया है जब दो चुनाव आयुक्तों की ओर से कथित तौर पर दर्ज आपत्तियों को लेकर सार्वजनिक बहस चल रही है। आयोग ने अपने ताजा रुख में दोहराया है कि अलग-अलग स्तर पर सुझाव या सवाल उठना निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा है और अंतिम निर्णय पूर्ण आयोग की सर्वसम्मति से लिए गए हैं।


