
Ranchi: गुमला जिले की तेरह वर्षीय दुष्कर्म पीड़िता बच्ची की रिम्स में कथित तौर पर समुचित इलाज के अभाव में हुई मौत के मामले में राज्य सरकार ने कड़ा कदम उठाया है। इस पूरे प्रकरण की विस्तृत और निष्पक्ष जांच के लिए सरकार ने दो सदस्यीय उच्चस्तरीय प्रशासनिक कमेटी का गठन किया है। जारी आधिकारिक आदेश के अनुसार इस जांच दल में IAS अधिकारी नेहा अरोड़ा और IPS अधिकारी सरोजनी लकड़ा को शामिल किया गया है। कमेटी को निर्देश दिया गया है कि वह अगले तीन दिनों के भीतर पूरे मामले की गहन पड़ताल पूरी कर अपनी विस्तृत रिपोर्ट सरकार को सौंपे।

पालकोट में हुई थी दरिंदगी, रिम्स में तोड़ा था दम
गुमला जिले के पालकोट थाना क्षेत्र में तेरह वर्षीय बच्ची के साथ दुष्कर्म की जघन्य वारदात हुई थी। घटना के बाद पीड़िता को प्राथमिक उपचार दिलाने के पश्चात बेहतर चिकित्सीय देखरेख के लिए राजधानी रांची स्थित राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (RIMS) में भर्ती कराया गया था। परिजनों का सीधा आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन की ओर से समय पर और उचित इलाज मुहैया नहीं कराया गया, जिसके चलते बच्ची की हालत बिगड़ती चली गई और 25 सितंबर को उसने दम तोड़ दिया। मौत के बाद रिम्स में पोस्टमॉर्टम कराकर शव परिजनों को सौंप दिया गया था।

राजनीतिक विरोध और स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल
बच्ची की दर्दनाक मौत का मामला सामने आते ही राज्य का सियासी तापमान बढ़ गया था। विभिन्न राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों ने सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली को लेकर कड़ा ऐतराज जताया था और स्वास्थ्य मंत्री पर सीधा निशाना साधते हुए लापरवाही के लिए जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई की मांग उठाई थी।
इलाज में लापरवाही और पुलिस की भूमिका की होगी जांच
बढ़ते जनआक्रोश को देखते हुए सरकार ने जांच कमेटी को बेहद स्पष्ट बिंदु तय करके दिए हैं। कमेटी इस बात की सूक्ष्म पड़ताल करेगी कि वारदात की सूचना मिलते ही पुलिस ने क्या कानूनी कार्रवाई की और पालकोट के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से लेकर रिम्स तक बच्ची को मिले इलाज में किस स्तर पर लापरवाही बरती गई। इसके साथ ही कमेटी को यह भी निर्देश दिया गया है कि वह जांच में दोषी पाए जाने वाले कर्मियों और अधिकारियों की जवाबदेही तय करे ताकि उनके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।


