
Chaibasa: पश्चिमी सिंहभूम जिले के सारंडा स्थित टिटिलीघाट निवासी पूर्व नक्सली मुगा चांपिया ने हिंसा छोड़कर सरकार की पुनर्वास नीति के तहत मुख्यधारा में वापसी तो कर ली, लेकिन आत्मसमर्पण के करीब दो साल बाद भी उनकी कानूनी उलझनें खत्म होने का नाम नहीं ले रही हैं। लगातार मिल रहे अदालती नोटिस, मुकदमों की पेशी और वकीलों के खर्च के चलते वह इस समय गंभीर आर्थिक और मानसिक दबाव से जूझ रहे हैं।

पुनर्वास के बाद भी थानों से आ रहे नोटिस
मुगा चांपिया ने 11 अप्रैल 2024 को टोंटो थाने में प्रशासनिक अधिकारियों के समक्ष आत्मसमर्पण किया था। इसके बाद तय प्रक्रिया के तहत उन्हें हजारीबाग की खुली जेल भेजा गया था, जहां की अवधि पूरी कर वह बाहर आए। उन्हें उम्मीद थी कि सरकारी सहायता से वह परिवार के साथ सामान्य जिंदगी शुरू कर पाएंगे, लेकिन बाहर आते ही पुराने मामलों को लेकर नोटिस मिलने का सिलसिला फिर शुरू हो गया।

जराइकेला थाने से मिला हत्या और आर्म्स एक्ट का नोटिस
हाल ही में जराइकेला थाना पुलिस की ओर से उन्हें कांड संख्या 01/2024 के तहत नोटिस थमाया गया है। इस नोटिस में भारतीय दंड संहिता की धारा 302/24, 27 आर्म्स एक्ट और 17 सीएलए एक्ट के तहत दर्ज मामले का हवाला दिया गया है। दूसरी ओर मुगा के पास टोंटो थाना पुलिस द्वारा 24 अगस्त 2026 को जारी किया गया आधिकारिक आत्मसमर्पण प्रमाण पत्र भी मौजूद है, जिसमें उनके आत्मसमर्पण की विधिवत पुष्टि की गई है।
वकील की फीस और कोर्ट-कचहरी में खत्म हुई सहायता राशि
पत्रकारों से अपनी व्यथा साझा करते हुए मुगा ने बताया कि बार-बार अदालत के चक्कर काटने, आवागमन और वकील की फीस भरने में पुनर्वास के तहत मिली सरकारी सहायता की बड़ी रकम पहले ही खत्म हो चुकी है। अपनी इन्हीं मुश्किलों को लेकर वह 29 अगस्त को गांव के मुंडा मंचूरिया सिद्धू के साथ छोटानागरा थाना भी पहुंचे थे और थाना प्रभारी को अपनी स्थिति से अवगत कराया था।
सामान्य जीवन के लिए प्रशासन से मांगी मदद
मुगा चांपिया का कहना है कि उन्होंने समाज की मुख्यधारा में रहकर शांति से जीने के लिए हथियार डाले थे। अब वह अपने परिवार के साथ बिना किसी डर के सामान्य जीवन बिताना चाहते हैं। उन्होंने जिला प्रशासन और पुलिस के आला अधिकारियों से मांग की है कि उनके खिलाफ दर्ज पुराने मामलों में स्थिति स्पष्ट की जाए और नियमानुसार कानूनी राहत दिलाई जाए ताकि उनका वास्तविक पुनर्वास संभव हो सके।


