
Digital Desk: नवरात्र के दौरान मां दुर्गा की आराधना के लिए श्रद्धालु तरह-तरह से पूजा-पाठ और व्रत रखते हैं, लेकिन रूपा देवी की साधना इन दिनों लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है। वह नुकीली लोहे की कीलों से बने बिस्तर पर लेटकर मां दुर्गा की आराधना कर रही हैं, जबकि उनके पेट पर पीतल का कलश रखा गया है और उसके ऊपर दीपक जल रहा है। परिवार के मुताबिक, रूपा देवी नौ दिनों तक इसी तरह पूजा करती हैं और यह सिलसिला पिछले तीन वर्षों से चल रहा है। उनकी इस अनोखी साधना को देखने के लिए आसपास के गांवों के साथ दूर-दराज से भी श्रद्धालु पहुंच रहे हैं, जिससे पूजा स्थल पर लोगों की भीड़ जुट रही है।

राजेश राम की पत्नी रूपा देवी शारदीय नवरात्र के पहले दिन से ही करीब 12 किलोग्राम वजन की लोहे की कीलों से बनी सेज पर लेटकर पूजा कर रही हैं। इस दौरान उनके पेट पर पीतल का कलश स्थापित किया गया है, जिस पर रखा दीपक लगातार जलाए रखने की व्यवस्था की गई है। परिवार का कहना है कि वह नवरात्र के नौ दिनों तक इसी स्थिति में रहकर मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा करती हैं और साथ ही मां मनसा देवी की भी नियमित आराधना करती हैं। उनकी यह साधना नवरात्र की नवमी तक जारी रहेगी, जिसके बाद नौ दिवसीय अनुष्ठान का समापन होगा।

तीन साल से कर रही हैं ऐसी साधना, परिवार भी दे रहा पूरा साथ
परिवार के अनुसार, रूपा देवी का झुकाव लंबे समय से पूजा-पाठ की ओर रहा है और पिछले तीन वर्षों से वह नवरात्र में इस तरह की कठिन साधना कर रही हैं। उनके पति राजेश राम पूजा की तैयारियों से लेकर अनुष्ठान के दौरान जरूरी व्यवस्थाओं को संभाल रहे हैं, जबकि परिवार के दूसरे सदस्य भी इसमें सहयोग कर रहे हैं। रूपा देवी के दो बच्चे हैं, जिनमें आठ साल का बेटा आदित्य कुमार और छह साल की बेटी अनन्या कुमारी शामिल हैं।
रूपा देवी की साधना की चर्चा आसपास के इलाकों में भी फैल गई है, जिसके बाद लोग उन्हें देखने और पूजा स्थल पर मां के दर्शन करने पहुंच रहे हैं। धूप-अगरबत्ती, भजन-कीर्तन और माता के जयकारों के बीच यहां भक्तिमय माहौल बना हुआ है। नवरात्र की नवमी पर इस अनुष्ठान का समापन होना है, लेकिन उससे पहले कीलों के बिस्तर पर लेटकर की जा रही यह पूजा लोगों के लिए आकर्षण और हैरानी का विषय बनी हुई है।


