
Ranchi: राजधानी रांची के रातू थाना क्षेत्र अंतर्गत सिमलिया गांव में एक 16 वर्षीय नाबालिग किशोरी को जबरन घर में बंधक बनाने और विवाह का दबाव डालने का सनसनीखेज मामला प्रकाश में आया है। घटना के बाद पीड़िता की तबीयत बिगड़ने पर उसे गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा है। मामले को लेकर नाबालिग के पिता राजदेव प्रसाद साह ने गांव के ही चंदन चौरसिया, उसकी मां और बहन के खिलाफ नामजद आरोप लगाते हुए रातू थाने में लिखित प्राथमिकी दर्ज कराई है। पुलिस ने आवेदन के आधार पर मामले की जांच शुरू कर दी है।

शाम को घर से बाहर निकली थी किशोरी, कमरे में मिली बंद
दर्ज कराई गई प्राथमिकी के मुताबिक, घटना 29 सितंबर की शाम की है। शाम करीब 6 बजे किशोरी किसी काम से घर से बाहर निकली थी, लेकिन काफी देर बीत जाने के बाद भी जब वह वापस नहीं लौटी तो परिजनों में बेचैनी बढ़ गई। परिवार के सदस्यों ने आसपास और गांव में खोजबीन शुरू की। तलाश के दौरान पता चला कि नाबालिग गांव के ही चंदन चौरसिया के घर में है। परिजन जब वहां पहुंचे तो देखा कि किशोरी को एक कमरे में बंद करके रखा गया था और उसे परिजनों के पास लौटने से रोका जा रहा था।

सिंदूर देकर जबरन शादी का दबाव, परिजनों को जान से मारने की धमकी
पीड़िता के पिता का आरोप है कि जब वे अपनी बेटी को छुड़ाने पहुंचे, तो चंदन और उसके परिजनों ने शादी की जिद पकड़ ली। आरोप के अनुसार, चंदन की मां और बहन ने नाबालिग को सिंदूर देकर शादी करने और हमेशा के लिए उसी घर में रहने का भारी दबाव बनाया। जब परिजनों ने इसका कड़ा विरोध किया और बच्ची को अपने साथ वापस घर ले आए, तो आरोपी पक्ष ने विवाद खड़ा कर दिया और पूरे परिवार को जान से मारने की सीधी धमकी दी।
नशीला पदार्थ खिलाने और इंजेक्शन देने का आरोप, सेवा सदन में चल रहा इलाज
पिता ने पुलिस को दिए आवेदन में बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि बंधक बनाए रखने के दौरान नाबालिग को कोई नशीला पदार्थ खिलाया गया और संदिग्ध इंजेक्शन दिया गया, जिससे वह बेसुध हो गई। घटना के अगले दिन, 30 सितंबर को किशोरी की हालत अचानक बेहद बिगड़ गई। उसे लगातार उल्टी और चक्कर आने लगे और वह बेहोश हो गई। आनन-फानन में परिजन उसे रांची के सेवा सदन अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों की गहन देखरेख में उसका इलाज जारी है। पिता का दावा है कि उपचार के दौरान किशोरी को तीन यूनिट खून भी चढ़ाना पड़ा।
2 अक्टूबर को दर्ज हुई शिकायत, मेडिकल रिपोर्ट पर टिकी पुलिस की जांच
नाबालिग के पिता ने स्पष्ट किया कि बेटी की जान बचाने और अस्पताल में उसके इलाज की व्यस्तता के चलते वे घटना के तुरंत बाद थाने नहीं पहुंच सके थे। बच्ची की हालत में आंशिक सुधार होने के बाद उन्होंने 2 अक्टूबर को रातू थाना पहुंचकर पूरे घटनाक्रम की लिखित शिकायत सौंपी। पुलिस का कहना है कि प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है और मामले की कानूनी छानबीन की जा रही है। वहीं, किशोरी को नशीला पदार्थ या इंजेक्शन दिए जाने के आरोपों की पुष्टि मेडिकल और फॉरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।


