
Ranchi/Jamshedpur: क्रिकेट की पिच पर जब एक लेग स्पिनर अपनी उंगलियों की जादूगरी से बल्लेबाजों को छकाता है, तो उसकी नजरें सिर्फ स्टंप्स पर टिकी होती हैं। लेकिन जमशेदपुर के सोनारी इलाके में रहने वाले राष्ट्रीय क्रिकेटर एनएन सुब्रमण्यम का सपना सिर्फ 22 गज की पट्टी तक सीमित नहीं था। उनकी नजर देश की रक्षा करने वाली खाकी और जैतून की वर्दी पर भी थी। कड़ी मेहनत, दिन रात के पसीने और अटूट इरादों के दम पर अब इस युवा खिलाड़ी ने वो कर दिखाया है, जिससे न सिर्फ जमशेदपुर बल्कि पूरे झारखंड का नाम रोशन हो गया है। सुब्रमण्यम का चयन भारतीय थल सेना यानी टेरिटोरियल आर्मी में अफसर के पद पर हुआ है।

माही के बाद यह मुकाम हासिल करने वाले दूसरे क्रिकेटर
झारखंड के लिए अंडर-19 क्रिकेट में अपनी गेंदबाजी का लोहा मनवा चुके सुब्रमण्यम फिलहाल इंडियन मिलिट्री एकेडमी (IMA) देहरादून में अपनी कठिन मिलिट्री ट्रेनिंग ले रहे हैं। ट्रेनिंग पूरी होते ही उन्हें भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट का पद मिलेगा, जो एक क्लास 1 अधिकारी का पद होता है। पूर्व भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धौनी के बाद सुब्रमण्यम राज्य के ऐसे दूसरे क्रिकेटर बन गए हैं जो सेना में लेफ्टिनेंट की वर्दी पहनेंगे। हालांकि धौनी को मानद उपाधि मिली थी, जबकि सुब्रमण्यम ने परीक्षा और इंटरव्यू की कठिन प्रक्रिया को पार कर अपनी काबिलियत के दम पर यह मुकाम हासिल किया है।

2 लाख उम्मीदवारों के बीच हासिल की 13वीं रैंक
सुब्रमण्यम का यह सफर आसान बिल्कुल नहीं था। जुलाई 2025 में आयोजित टेरिटोरियल आर्मी अफसर भर्ती परीक्षा में देशभर से लगभग 2 लाख अभ्यर्थी शामिल हुए थे। कड़े मुकाबले के बाद जनवरी 2026 में प्रयागराज स्थित सेलेक्शन सेंटर में हुए एसएसबी इंटरव्यू के लिए केवल 900 अभ्यर्थियों का चयन हुआ। इसके बाद पांच दिनों तक चले बेहद कठिन एसएसबी इंटरव्यू को पार करके महज 23 अभ्यर्थी ही आगे बढ़ पाए। कुल 18 खाली पदों के मुकाबले सुब्रमण्यम ने ऑल इंडिया मेरिट लिस्ट में 13वीं रैंक हासिल कर अपनी जगह पक्की की।
क्रिकेट के मैदान से सेना तक का सफर
कदमा स्थित स्कूल ऑफ क्रिकेट से अपने खेल की शुरुआत करने वाले सुब्रमण्यम ने अपनी शुरुआती पढ़ाई केएसएमएस से पूरी की है। वे वीजी ट्रॉफी और ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी प्रतियोगिताओं में भी अपनी शानदार गेंदबाजी से अपनी पहचान बना चुके हैं। सुब्रमण्यम ने अपनी इस ऐतिहासिक सफलता का श्रेय अपने पिता एनवी नीलकंठ, माता मंगलम नीलकंठ, अपने कोच राजीव नायर और पत्नी शुभ्रा नायर को दिया है। उनकी इस उपलब्धि पर खेल प्रेमियों और शहरवासियों में बेहद खुशी का माहौल है।


