
Chatra: चतरा जिले में अपनी चार महीने पुरानी लंबित मांगों को लेकर 108 एम्बुलेंस कर्मचारियों का गुस्सा सामने आया है। झारखंड प्रदेश एम्बुलेंस कर्मचारी संघ के आह्वान पर कर्मियों ने सिविल सर्जन कार्यालय के समक्ष भिक्षाटन कर अपना विरोध जताया। संघ के जिलाध्यक्ष मुकेश कुमार ने बताया कि एम्बुलेंस कर्मचारियों का जुलाई महीने से वेतन अटका हुआ है, जिससे उनके सामने गहरा आर्थिक संकट पैदा हो गया है।

वेतन कटौती और एम्बुलेंस मरम्मत न होने से परेशानी
कर्मचारियों का आरोप है कि समय पर वेतन न मिलने के अलावा उनका मनमाने ढंग से वेतन काटा जा रहा है। इसके साथ ही एम्बुलेंस की समय पर मरम्मत न होने से आपातकालीन सेवाओं पर भी असर पड़ रहा है। संघ की मुख्य मांगों में एम्बुलेंस सेवा का संचालन सीधे जिला स्तर पर सिविल सर्जन के माध्यम से कराने, सेवा से हटाए गए कर्मचारियों की दोबारा बहाली करने और श्रम कानूनों के तहत मिलने वाले सभी अधिकार लागू करने की मांग शामिल है।

स्वास्थ्य मंत्री के आश्वासन के बाद भी नहीं हुआ समाधान
संघ के पदाधिकारियों ने बताया कि 16 सितंबर 2026 को राज्य के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी की मौजूदगी में हुई बैठक में 15 से 20 दिनों के अंदर समस्याओं के समाधान का भरोसा दिया गया था। हालांकि तय समय सीमा बीत जाने के बाद भी कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। इसके चलते कर्मचारियों को अपना आंदोलन जारी रखने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
मांगें पूरी होने तक चरणबद्ध आंदोलन की चेतावनी
चतरा जिला अध्यक्ष मुकेश कुमार ने राज्य सरकार से मांग की है कि एम्बुलेंस कर्मचारियों की समस्याओं पर तुरंत विचार कर फैसला लागू किया जाए। संघ ने साफ कर दिया है कि जब तक उनकी जायज मांगों पर ठोस और लिखित कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनका यह चरणबद्ध आंदोलन लगातार जारी रहेगा।


