
New Delhi: शिवसेना (UBT) के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने सुप्रीम कोर्ट से माफी मांगते हुए कहा है कि उनका उद्देश्य अदालत का अपमान करना नहीं था. उन्होंने न्यायपालिका के प्रति सम्मान जताते हुए चुनाव आयोग से जुड़े मामले में न्याय मिलने की उम्मीद भी जाहिर की. उनका यह बयान विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर चल रही कानूनी लड़ाई के बीच आया है.



सुप्रीम कोर्ट को बताया न्याय की आखिरी उम्मीद
संजय राउत ने कहा कि उन्हें सुप्रीम कोर्ट से माफी मांगने में कोई परेशानी नहीं है. उन्होंने अदालत से अपील की कि उनकी याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए न्याय दिया जाए. राउत के मुताबिक, विपक्ष चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर सवाल उठा रहा है और इस मामले में न्यायपालिका से निष्पक्ष कार्रवाई की उम्मीद करता है.
उन्होंने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट देश की महत्वपूर्ण संवैधानिक संस्थाओं में से एक है और संविधान की रक्षा में उसकी अहम भूमिका है.

मुख्य न्यायाधीश पर टिप्पणी को लेकर बढ़ा विवाद
यह विवाद तब बढ़ा, जब राउत ने भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की विपक्षी नेताओं से मुलाकात नहीं होने पर सवाल उठाए थे. उन्होंने न्यायाधीशों के राजनीतिक नेताओं से मेलजोल को लेकर भी टिप्पणी की थी. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने उनके बयानों को लेकर अवमानना की कार्यवाही शुरू करने की अनुमति मांगी. अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने इस मामले में सहमति दे दी.

SIR मामले में भी जारी है कानूनी लड़ाई
राहुल गांधी समेत विपक्षी नेताओं ने चुनाव आयोग के कामकाज और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है. राउत भी इस याचिका के याचिकाकर्ताओं में शामिल हैं. अदालत ने फिलहाल उनकी याचिका पर सुनवाई की अनुमति इस शर्त पर दी है कि वह अपनी टिप्पणियों को लेकर स्पष्टीकरण दें.
राउत ने अपने बयान में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से भी माफी मांगने की मांग की. उनका आरोप है कि विपक्ष को लगातार धमकियां दी जा रही हैं. हालांकि, ये उनके राजनीतिक आरोप हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है.
फिलहाल, इस मामले में अदालत के सामने राउत के बयानों और उनके स्पष्टीकरण का मुद्दा महत्वपूर्ण बना हुआ है. वहीं, SIR और चुनाव आयोग से जुड़ी याचिकाओं पर आगे की सुनवाई से यह स्पष्ट होगा कि मामले में अगला कानूनी कदम क्या होगा.


