
Delhi High Court: दिल्ली हाई कोर्ट ने वर्ष 2020 के दिल्ली दंगा षड्यंत्र मामले की आरोपी छात्र कार्यकर्ता नताशा नरवाल को शैक्षणिक कार्यों के लिए ब्रिटेन जाने की इजाजत दे दी है। अदालत ने स्पष्ट शर्त रखी है कि विदेश प्रवास के दौरान वह वहां राजनीतिक शरण यानी असाइलम के लिए कोई अर्जी नहीं लगाएंगी। कोर्ट के आदेश के मुताबिक नताशा दो नवंबर से एक दिसंबर तक ब्रिटेन में रह सकेंगी। यात्रा की अनुमति के लिए उन्हें एक लाख रुपये का निजी मुचलका भरना होगा और उनके भाई को इस मामले में औपचारिक रूप से जमानतदार बनना होगा।

रिसर्च पेपर और पीएचडी के सिलसिले में यात्रा जरूरी
नताशा नरवाल को लंदन स्थित प्रतिष्ठित स्कूल ऑफ ओरिएंटल एंड अफ्रीकन स्टडीज में पांच से आठ नवंबर के बीच अपना रिसर्च पेपर प्रस्तुत करना है। इसके साथ ही वह वारविक यूनिवर्सिटी में अपनी पीएचडी से जुड़े संदर्भ में सुपरवाइजर से व्यक्तिगत मुलाकात करेंगी और लाइब्रेरी से जरूरी ऐतिहासिक व शैक्षणिक दस्तावेज जुटाएंगी। नताशा ने वर्ष 2023 में वारविक यूनिवर्सिटी के पीएचडी पाठ्यक्रम में दाखिला लिया था और अब तक वह भारत में रहकर ऑनलाइन माध्यम से ही अपनी पढ़ाई जारी रखे हुए थीं।

दिल्ली पुलिस ने जताई थी शरण मांगने की आशंका
दिल्ली पुलिस ने नताशा की इस विदेश यात्रा का कड़ा विरोध किया था। अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने दलील दी थी कि आरोपी ब्रिटेन पहुंचकर राजनीतिक प्रताड़ना का हवाला देकर शरण मांग सकती हैं और ब्रिटेन के जटिल प्रत्यर्पण नियमों के चलते उन्हें वापस भारत लाना बेहद मुश्किल हो जाएगा। पुलिस का कहना था कि रिसर्च पेपर और अन्य काम ऑनलाइन भी निपटाए जा सकते हैं। निचली अदालत द्वारा छह अक्टूबर को विदेश जाने की अनुमति खारिज किए जाने के बाद नताशा ने दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
ट्रायल में 20 साल लग सकते हैं, कोर्ट की अहम टिप्पणी
जस्टिस अमित बंसल की अदालत ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि जब यह यात्रा पूरी तरह शिक्षा से संबंधित है, तो कुछ शर्तों के साथ जाने की अनुमति दी जानी चाहिए। अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि इस मुकदमे की सुनवाई पूरी होने में करीब 20 साल तक का लंबा समय लग सकता है, ऐसे में किसी प्रतिष्ठित संस्थान में पढ़ाई करने की जरूरत को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
शपथ पत्र और केस पर बयानबाजी न करने की पाबंदी
हाई कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि नताशा और उनके भाई को अदालत में लिखित वचन देना होगा कि वह दो दिसंबर तक भारत वापस लौट आएंगी। ब्रिटेन में रहते हुए वह अपने खिलाफ चल रहे आपराधिक मुकदमे के गुण-दोष पर किसी तरह की सार्वजनिक बयानबाजी नहीं करेंगी। कोर्ट ने उन्हें वीजा आवेदन से जुड़े दस्तावेज जमा करने का निर्देश दिया और कहा कि इस एक महीने की तय अवधि के दौरान उनके खिलाफ जारी लुकआउट सर्कुलर निलंबित रहेगा। नताशा नरवाल को फरवरी 2020 के दंगों के दौरान यूएपीए के तहत गिरफ्तार किया गया था और करीब 14 महीने जेल में काटने के बाद वर्ष 2021 में उन्हें नियमित जमानत मिली थी।


