
Health : सुबह की शुरुआत हो या शाम की थकान मिटानी हो, चाय और कॉफी करोड़ों लोगों की दिनचर्या का हिस्सा हैं. कई लोगों को तो कप में भाप उठती चाय पीना ही पसंद होता है. लेकिन अगर आप भी पेय पदार्थों को बेहद गर्म हालत में पीते हैं, तो अपनी इस आदत पर दोबारा विचार करने की जरूरत है. ब्रिटेन में करीब 9.8 लाख वयस्कों पर किए गए एक बड़े अध्ययन में बहुत गर्म पेय पदार्थों के सेवन और खाने की नली के एक खास प्रकार के कैंसर के बीच संबंध पाया गया है.

तापमान बढ़ने के साथ बढ़ा कैंसर का खतरा
ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने यूके बायोबैंक और मिलियन विमेन स्टडी के आंकड़ों का विश्लेषण किया. अध्ययन में शामिल लोगों से पूछा गया था कि वे आमतौर पर चाय या कॉफी कितनी गर्म पीते हैं. इसके बाद एक दशक से अधिक समय तक उनके स्वास्थ्य संबंधी रिकॉर्ड का अध्ययन किया गया. शोध के दौरान खाने की नली के कैंसर के 2,348 मामले सामने आए. इनमें 1,045 मामले स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा और 1,303 मामले एडेनोकार्सिनोमा के थे.

शोधकर्ताओं ने पाया कि गुनगुने पेय पदार्थ पसंद करने वालों की तुलना में बेहद गर्म पेय पीने वाले लोगों में एसोफैगल स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा का सापेक्ष जोखिम लगभग तीन गुना था. हालांकि, दूसरे प्रमुख प्रकार के कैंसर यानी एडेनोकार्सिनोमा के साथ ऐसा संबंध नहीं मिला.
दिन में कितनी बार पीते हैं चाय-कॉफी?
अध्ययन में केवल पेय पदार्थों का तापमान ही नहीं, बल्कि उनकी खपत की मात्रा भी महत्वपूर्ण पाई गई. दिन में छह या उससे अधिक गर्म पेय पीने वालों में छह से कम पेय पीने वालों की तुलना में स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा का जोखिम 71 प्रतिशत अधिक देखा गया.
शोधकर्ताओं के मुताबिक, चाय या कॉफी में से कौन-सा पेय लिया जा रहा है, उससे अधिक महत्वपूर्ण उसका तापमान दिखाई दिया. हालांकि, ये निष्कर्ष दोनों के बीच संबंध दर्शाते हैं; इनसे यह साबित नहीं होता कि गर्म पेय पीने से हर व्यक्ति को कैंसर होगा.

आखिर खाने की नली को कैसे नुकसान पहुंचाती है गर्मी?
खाने की नली मुंह से पेट तक भोजन और तरल पदार्थ पहुंचाने का काम करती है. बहुत अधिक तापमान वाले पेय पदार्थों को बार-बार पीने से इसकी अंदरूनी परत को नुकसान पहुंच सकता है. वैज्ञानिकों का मानना है कि गर्मी के कारण बार-बार होने वाली चोट और सूजन कैंसर से जुड़ी कोशिकीय प्रक्रियाओं में भूमिका निभा सकती है.
अंतरराष्ट्रीय कैंसर अनुसंधान एजेंसी (IARC) ने 65 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान पर पिए जाने वाले पेय पदार्थों को मनुष्यों के लिए संभावित रूप से कैंसरकारी श्रेणी में रखा है. यह वर्गीकरण अत्यधिक गर्म पेय पदार्थों के सेवन से संबंधित है, न कि चाय या कॉफी को अपने आप में कैंसरकारी घोषित करता है.



