बेगूसराय: बिहार के बेगूसराय जिले में शिक्षा विभाग की एक बड़ी लापरवाही सामने आई है। गढ़पुरा मध्य विद्यालय के जिस शिक्षक रामानुज शर्मा का निधन करीब तीन महीने पहले हो चुका है, विभाग ने उन्हें प्रशिक्षण से अनुपस्थित बताते हुए स्पष्टीकरण मांग लिया। 15 अक्टूबर को जारी पत्र में तत्कालीन प्रभारी प्रधानाध्यापक से जवाब मांगा गया, जबकि उनका निधन 21 जुलाई को ही हो गया था। इस मामले ने विभागीय रिकॉर्ड के रखरखाव और सूचनाओं के सत्यापन की प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

15 अक्टूबर को जारी हुआ स्पष्टीकरण का पत्र
मामला जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट), बेगूसराय में 12 से 16 अक्टूबर तक आयोजित आवासीय प्रशिक्षण से जुड़ा है। प्रशिक्षण में अनुपस्थित रहने वाले शिक्षकों की सूची तैयार की गई थी। इसी सूची में रामानुज शर्मा का नाम भी शामिल कर लिया गया।

सूची के आधार पर जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) कुमार अनुभव ने उन्हें स्पष्टीकरण देने का निर्देश जारी किया। हालांकि, शिक्षक की मृत्यु के बाद उनके नाम पर पत्र जारी होने से विभागीय स्तर पर तैयार की गई सूची की विश्वसनीयता पर सवाल उठने लगे हैं।
विद्यालय से जानकारी का सत्यापन क्यों नहीं हुआ?
इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि प्रशिक्षण से अनुपस्थित शिक्षकों की सूची तैयार करने से पहले संबंधित विद्यालय से जानकारी का सत्यापन क्यों नहीं किया गया। यदि शिक्षक के निधन की सूचना विभाग तक पहुंच चुकी थी, तो उनके नाम पर स्पष्टीकरण मांगने का पत्र कैसे जारी हो गया? यह घटना विभागीय अभिलेखों को अपडेट रखने और विभिन्न स्तरों पर सूचनाओं के आदान-प्रदान की प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े करती है।
जिला स्तर पर भेजी गई थी निधन की सूचना
प्रभारी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी (BEO) गोविंद कुमार ने बताया कि मध्य विद्यालय, गढ़पुरा के प्रभारी प्रधानाध्यापक रामानुज शर्मा की असामयिक मृत्यु के बाद इसकी सूचना की प्रतिलिपि जिला को भेज दी गई थी।
ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि सूचना भेजे जाने के बावजूद जिला स्तर पर तैयार सूची में दिवंगत शिक्षक का नाम कैसे शामिल रह गया। इस चूक से शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।
अब जिम्मेदारी तय करने पर नजर
दिवंगत शिक्षक से स्पष्टीकरण मांगने का यह मामला केवल एक पत्र जारी होने की गलती तक सीमित नहीं है। यह विभागीय रिकॉर्ड के अद्यतन, सूचनाओं के सत्यापन और प्रशासनिक समन्वय की व्यवस्था की समीक्षा की जरूरत भी दर्शाता है।
अब देखना होगा कि शिक्षा विभाग इस मामले की जांच कर गलती के कारणों की समीक्षा करता है या नहीं और इसके लिए जिम्मेदारी तय करने को लेकर क्या कदम उठाए जाते हैं।


