
Mumbai: शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के सांसद संजय राउत की एक सोशल मीडिया पोस्ट ने राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है. राउत ने यूरोपीय देश अल्बानिया में सरकार के खिलाफ हो रहे प्रदर्शनों का वीडियो साझा करते हुए भारत को भी इन घटनाओं से सबक लेने की बात कही. उनके इस पोस्ट पर भाजपा नेताओं ने कड़ी आपत्ति जताई है.

क्या लिखा था संजय राउत ने अपनी पोस्ट में ?
संजय राउत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अल्बानिया में जारी विरोध प्रदर्शनों का जिक्र किया. उन्होंने दावा किया कि वहां के लोग इसलिए नाराज थे, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट कथित तौर पर भ्रष्ट प्रधानमंत्री की मदद कर रहा था.

राउत ने अपनी पोस्ट में यह भी उल्लेख किया कि प्रदर्शनकारियों ने संसद, सरकारी कार्यालयों और मंत्रियों के घरों को निशाना बनाया. उन्होंने दुनिया के दूसरे देशों और खास तौर पर भारत को इन घटनाओं से सबक लेने की सलाह दी.
उनकी इस टिप्पणी के बाद राजनीतिक गलियारों में बहस शुरू हो गई. विवाद का मुख्य कारण अल्बानिया में हुई हिंसा का भारतीय लोकतांत्रिक संस्थाओं से तुलना के संदर्भ में इस्तेमाल करना है.
भाजपा ने संजय राउत पर क्यों साधा निशाना?
राउत की पोस्ट पर भाजपा नेता किरीट सोमैया ने तीखी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने आरोप लगाया कि राउत अल्बानिया में हुई आगजनी का समर्थन कर रहे हैं और उनके बयान से अराजकता को बढ़ावा मिलने का खतरा है.
सोमैया ने न्यायपालिका और संवैधानिक संस्थाओं के प्रति सम्मान बनाए रखने की जरूरत पर जोर दिया. उन्होंने राउत की टिप्पणी को अनुचित बताते हुए उनकी आलोचना की. इस तरह एक अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम को लेकर शुरू हुई चर्चा ने भारतीय राजनीति में नया विवाद पैदा कर दिया है.
आखिर अल्बानिया में क्या हुआ?
अल्बानिया की राजधानी तिराना में सरकार के खिलाफ कई दिनों से विरोध प्रदर्शन चल रहे हैं. इन प्रदर्शनों के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें हुईं. कुछ सरकारी इमारतों और अन्य परिसरों में आगजनी की घटनाएं भी सामने आईं.
अल्बानिया में सुप्रीम कोर्ट के कार्यालयों के पास आग लगने की खबरें भी आई हैं. हालांकि, अदालत की इमारत में आग कैसे लगी और इसके पीछे क्या कारण थे, इसे लेकर सामने आई रिपोर्टों में अंतर है. इसलिए इस घटना को लेकर किसी एक दावे को बिना पुष्टि के अंतिम तथ्य के रूप में पेश करना सही नहीं होगा. राउत ने इसी घटनाक्रम का हवाला देते हुए भारत को सबक लेने की बात कही थी.
राजनीतिक बयानबाजी के बीच न्यायपालिका पर बहस
संजय राउत की टिप्पणी ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि राजनीतिक विरोध जताते समय संवैधानिक संस्थाओं और दूसरे देशों में हुई हिंसक घटनाओं का उदाहरण किस तरह दिया जाना चाहिए.
भाजपा ने उनके बयान को गैर-जिम्मेदाराना बताया है, जबकि राउत की पोस्ट में अल्बानिया की घटनाओं के आधार पर भारत को संदेश देने की बात कही गई है. अल्बानिया में जारी विरोध प्रदर्शनों और भारत में उठे इस विवाद पर आगे क्या प्रतिक्रिया आती है, इस पर नजर बनी हुई है.


