कहते हैं कि प्यार पर पहरा लगाया जा सकता है, लेकिन दिलों के बीच बनी दूरी को मिटाना आसान नहीं होता। कुछ ऐसा ही नजारा मोतिहारी में देखने को मिला, जहां इंस्टाग्राम से शुरू हुई दो साल की प्रेम कहानी आखिरकार मंदिर में शादी तक पहुंच गई। परिवार की नाराजगी, मिलने-जुलने पर रोक और लगातार बढ़ते विवाद के बीच हिंदरी बाजार की आरती कुमारी और छतौनी के देवा दास की प्रेम कहानी ने ऐसा मोड़ लिया कि मोहल्ले के लोगों को ही दोनों के रिश्ते का फैसला कराने के लिए आगे आना पड़ा।

कहानी करीब दो साल पहले शुरू हुई थी। सोशल मीडिया के प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर आरती और देवा की पहचान हुई। बातचीत का सिलसिला बढ़ा और धीरे-धीरे दोनों एक-दूसरे के करीब आ गए। दोस्ती कब प्यार में बदल गई, शायद दोनों को भी इसका एहसास नहीं हुआ। इसके बाद मुलाकातों का दौर शुरू हुआ। दोनों चोरी-छिपे मिलने लगे और अपने रिश्ते को आगे बढ़ाने की कोशिश करते रहे।

प्यार पर पहरा, फिर भी मुलाकातों का सिलसिला जारी
जब परिवार वालों को दोनों के रिश्ते की जानकारी मिली तो विरोध शुरू हो गया। दोनों पर निगरानी बढ़ाई गई और मुलाकातों को रोकने की कोशिश की गई। लेकिन प्रेमी जोड़े का मिलना-जुलना बंद नहीं हुआ। बताया जाता है कि विवाद इतना बढ़ा कि प्रेमी की पिटाई भी की गई। मामला पुलिस तक पहुंचा। पुलिस ने हस्तक्षेप करते हुए दोनों परिवारों को इसकी जानकारी दी और प्रेमी जोड़े को घर भेज दिया।
परिवार की नाराजगी और सामाजिक दबाव के बावजूद दोनों का मिलना जारी रहा। यही बात मोहल्ले के लोगों को नागवार गुजरने लगी। स्थानीय लोगों ने दोनों परिवारों को इसकी जानकारी दी और परिजनों को बुलाया। इसके बाद घटनाक्रम ने नया मोड़ ले लिया।
मोहल्ले वालों ने संभाली कमान, मंदिर बना शादी का गवाह
लगातार विवाद और चोरी-छिपे मुलाकातों के बीच स्थानीय लोगों ने दोनों की शादी कराने का फैसला किया। मंदिर में शादी की तैयारी हुई। माला मंगवाई गई, पंडित को बुलाया गया और विवाह की रस्में पूरी कराई गईं। इसके बाद देवा दास ने आरती कुमारी की मांग में सिंदूर भरा और दोनों विवाह के बंधन में बंध गए।
जिस प्रेम संबंध को लेकर परिवारों में नाराजगी थी, वही रिश्ता आखिरकार शादी तक पहुंच गया। दो साल पहले सोशल मीडिया पर शुरू हुई बातचीत ने मंदिर में वैवाहिक रिश्ते का रूप ले लिया। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम में दोनों की स्वतंत्र सहमति और विवाह की कानूनी शर्तों की पुष्टि महत्वपूर्ण है।
आरती बोली – पहले नाराज थे घरवाले, अब शादी से खुश हूं
आरती कुमारी ने बताया कि करीब दो साल पहले इंस्टाग्राम के माध्यम से दोनों की पहचान हुई थी। धीरे-धीरे दोनों के बीच प्यार हो गया। शुरुआत में परिवार के लोग इस रिश्ते से नाराज थे, लेकिन अब शादी हो रही है और वह खुश है। आरती के मुताबिक, अब दोनों परिवारों की सहमति से विवाह संपन्न हुआ है।
समाजसेवी संजीत कुमार ने बताया कि प्रेमी जोड़े के लगातार मिलने की सूचना मिल रही थी। इसके बाद स्थानीय लोगों ने मिलकर दोनों की मंदिर में शादी कराने का निर्णय लिया। उनका कहना है कि इस पहल का उद्देश्य मामले को समाप्त कराना और दोनों के रिश्ते को एक दिशा देना था।
सोशल मीडिया से शुरू रिश्ते, समाज के सामने कई सवाल
मोतिहारी की यह कहानी केवल इंस्टाग्राम पर शुरू हुए प्यार और मंदिर में हुई शादी की कहानी नहीं है। यह परिवारों की चिंता, युवाओं के फैसले और सामाजिक हस्तक्षेप के बीच रिश्तों को लेकर बदलती सोच की भी तस्वीर पेश करती है। सवाल यह भी है कि जब दो लोग किसी रिश्ते में आगे बढ़ना चाहते हैं, तो परिवार और समाज की भूमिका क्या होनी चाहिए? क्या विवाद का समाधान दबाव से निकल सकता है या बातचीत और आपसी सहमति से?
इस मामले में मोहल्ले के लोगों ने शादी कराकर विवाद खत्म करने की पहल की। लेकिन किसी भी विवाह का सबसे जरूरी आधार दोनों पक्षों की स्वतंत्र सहमति, कानूनी उम्र और कानून के तहत पूरी की गई आवश्यक शर्तें हैं।
(प्रतिक सिंह की रिपोर्ट)


