Mangaluru : कर्नाटक के मंगलुरु में नाबालिग लड़कों के कथित यौन उत्पीड़न के मामले में पुलिस ने एक कैथोलिक पादरी को गिरफ्तार किया है. आरोपी की पहचान फादर साइप्रियन पिंटो के रूप में हुई है. वह वेलेंसिया स्थित सेंट विंसेंट फेरर चर्च से जुड़ा था. मामले की शुरुआत एक नाबालिग की शिकायत से हुई, लेकिन जांच के दौरान दूसरे बच्चों के साथ भी कथित दुर्व्यवहार की जानकारी सामने आई. पुलिस अब सभी आरोपों की पड़ताल कर रही है.
रिश्तेदार के घर से पकड़ा गया आरोपी
मंगलुरु साउथ पुलिस ने साइप्रियन पिंटो को हासन जिले के सकलेशपुर में उसके एक रिश्तेदार के घर से गिरफ्तार किया. पुलिस आयुक्त सुधीर कुमार रेड्डी ने गिरफ्तारी की पुष्टि की. बाद में आरोपी को अदालत में पेश किया गया और उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया.
पुलिस ने इस मामले में यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम यानी POCSO की धारा 8 और 10 के साथ भारतीय न्याय संहिता की धारा 75(2) के तहत केस दर्ज किया है.
एक बच्चे की शिकायत से सामने आए दूसरे मामले
शिकायत के मुताबिक, एक 14 वर्षीय लड़का नियमित रूप से प्रार्थना के लिए चर्च जाता था. आरोप है कि पादरी ने उसे चर्च परिसर में सेक्रेस्टी के पास बने कमरे और अपने निजी कमरे में बुलाकर उसके साथ अनुचित व्यवहार किया.
बताया गया है कि बच्चे ने जब अपने दोस्तों से इस बारे में बात की, तो कुछ अन्य लड़कों ने भी इसी तरह के अनुभव साझा किए. द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस को कम से कम पांच बच्चों के साथ कथित दुर्व्यवहार की जानकारी मिली है. जांच एजेंसियां इन शिकायतों की पुष्टि करने में जुटी हैं.
पहले चर्च प्रशासन तक पहुंचा था मामला
रिपोर्ट के मुताबिक, बच्चों के परिवारों ने शुरुआत में मंगलुरु धर्मप्रांत के बिशप के सामने अपनी शिकायत रखी थी. परिजनों को अपेक्षित मदद नहीं मिलने के बाद मामला बाल संरक्षण अधिकारियों तक पहुंचा.
31 अगस्त को कर्नाटक के बाल संरक्षण निदेशालय ने दक्षिण कन्नड़ जिला बाल संरक्षण इकाई को आरोपों की जांच करने के निर्देश दिए थे. इसके बाद मामले में पुलिस की कार्रवाई आगे बढ़ी. मैसूर स्थित गैर-सरकारी संगठन ओदानाडी ने भी शिकायतों को पुलिस अधिकारियों के संज्ञान में लाने में भूमिका निभाई.
पुलिस की आगे की जांच
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, साइप्रियन पिंटो ने इससे पहले पेरमानूर स्थित सेंट सेबेस्टियन चर्च में करीब छह साल तक पादरी के रूप में सेवा दी थी. मई 2026 में उन्हें वेलेंसिया के सेंट विंसेंट फेरर चर्च में नियुक्त किया गया था. अगस्त के अंत में उन्हें प्रशासनिक अवकाश पर भेजे जाने की जानकारी भी सामने आई थी.
फिलहाल पुलिस की जांच का उद्देश्य शिकायतों से जुड़े तथ्यों की पुष्टि करना और यह पता लगाना है कि कितने बच्चे कथित घटनाओं से प्रभावित हुए. आरोपी के खिलाफ लगे आरोपों पर अंतिम फैसला न्यायिक प्रक्रिया के तहत होगा.