JPSC Exam Scam: झारखंड लोक सेवा आयोग यानी JPSC की भर्ती परीक्षाओं में सामने आई कथित गड़बड़ी और OMR शीट में हेराफेरी के चर्चित मामले में CID ने अपनी जांच पूरी कर अदालत में चार्जशीट दाखिल कर दी है। जांच एजेंसी ने 90 दिनों की तय समयसीमा के भीतर पांच प्रमुख आरोपियों के खिलाफ यह आरोपपत्र पेश किया है। इनमें आयोग की तत्कालीन उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता, परीक्षा आयोजित कराने वाली एजेंसी TDPL के निदेशक रामवीर सिंह उर्फ आरवी सिंह, मार्केटिंग मैनेजर अभय कुमार तिवारी उर्फ मनोज कुमार तिवारी के साथ एजेंसी के दो कर्मचारी मो. उस्मान और मो. एबाद शामिल हैं। इन सभी आरोपियों को 22 जुलाई को न्यायिक हिरासत में भेजा गया था।

TDPL का निदेशक निकला पूरे खेल का मास्टरमाइंड
CID ने अपनी विस्तृत जांच में एजेंसी के निदेशक रामवीर सिंह को इस पूरे ओएमआर घोटाले का मुख्य सूत्रधार बताया है। आरोपपत्र के अनुसार भर्ती प्रक्रिया के दौरान एजेंसी के अधिकारियों ने अभ्यर्थियों के चयन को लेकर बड़ा खेल रचा। वहीं मार्केटिंग मैनेजर अभय तिवारी पर सीधे तौर पर अभ्यर्थियों से संपर्क साधने, उनसे मोटी रकम वसूलने और परीक्षा में पास कराने का पक्का भरोसा देने के संगीन आरोप तय किए गए हैं। जांच एजेंसी का कहना है कि परीक्षा की शुचिता को ताक पर रखकर अभ्यर्थियों से पैसे ऐंठने का पूरा नेटवर्क तैयार किया गया था।

ऑफिशियल रिलीज से पहले ही आंसर की साझा करने का आरोप
चार्जशीट में तत्कालीन उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता की भूमिका को लेकर भी चौंकाने वाले खुलासे किए गए हैं। उन पर आरोप है कि उन्होंने आधिकारिक तौर पर जारी होने से पहले ही उत्तर कुंजी को परीक्षा एजेंसी के साथ साझा कर दिया था। इसके बदले में एजेंसी के कर्मचारियों द्वारा उनके लिए हवाई टिकट बुक कराए जाने का ब्योरा भी आरोपपत्र में दर्ज किया गया है। सरकारी पद पर रहते हुए परीक्षा से जुड़ी अत्यंत गोपनीय जानकारियों को बाहर निकालने को लेकर उनके खिलाफ पुख्ता आरोप बनाए गए हैं।
डिजिटल डेटा में बदलाव और फॉरेंसिक सबूतों का दावा
एजेंसी के दो अन्य कर्मियों मो. उस्मान और मो. एबाद पर परीक्षा से जुड़ी बेहद संवेदनशील सामग्री और डिजिटल डेटा को बाहर ले जाकर उसमें छेड़छाड़ करने का आरोप लगाया गया है। सीआईडी का दावा है कि इस पूरे मामले में आरोपियों के खिलाफ तकनीकी रिकॉर्ड, डिजिटल फॉरेंसिक रिपोर्ट और पैसों के लेन देन से जुड़े मजबूत दस्तावेजी सबूत जुटाए गए हैं। अब अदालत इस आरोपपत्र और दाखिल किए गए साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद मामले में आगे की अदालती कार्यवाही और ट्रायल शुरू करेगी।


