सिवान: बिहार के सिवान जिले के जामो थाना क्षेत्र स्थित आलमपुर गांव में शुक्रवार शाम पटाखों में आग लगने के बाद जोरदार विस्फोट हुए। धमाकों से इलाके में अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोगों के मुताबिक, आग आसपास के उन मकानों तक भी फैल गई, जहां पटाखे बनाए जाते थे। देर शाम तक विस्फोट की आवाजें आती रहीं, जिससे राहत और बचाव कार्य में परेशानी हुई। घटना में कई लोगों की मौत और अन्य के घायल होने की खबर है।

पटाखा निर्माण के लिए जाना जाता है आलमपुर
स्थानीय लोगों के अनुसार, आलमपुर गांव लंबे समय से पटाखा निर्माण के लिए जाना जाता है। गांव के करीब एक दर्जन घरों में पटाखे बनाने का काम होता है। शादी-विवाह और अन्य मांगलिक आयोजनों के लिए दूर-दराज से लोग यहां ऑर्डर देने पहुंचते थे।

दीपावली, छठ और लगन के मौसम में पटाखों की मांग बढ़ जाती थी। ऐसे में गांव में पटाखा निर्माण और भंडारण का काम बड़े स्तर पर होने की बात सामने आ रही है।
एक मकान में आग के बाद लगातार हुए धमाके
शुक्रवार शाम मो. अमरुद्दीन के मकान में रखे पटाखों में आग लग गई। इसके बाद जोरदार विस्फोट होने लगे। स्थानीय लोगों का कहना है कि आग आसपास के उन मकानों तक भी फैल गई, जहां पटाखे बनाए जाते थे।
लगातार धमाकों के कारण दमकलकर्मियों और राहत-बचाव कार्य में जुटे कर्मियों को मुश्किलों का सामना करना पड़ा। विस्फोट की तीव्रता से मकान के क्षतिग्रस्त होने की भी खबर है। हादसे से करीब दो घंटे पहले बाजार गए थे अमरुद्दीन
स्थानीय लोगों के अनुसार, हादसे से करीब दो घंटे पहले मो. अमरुद्दीन बाइक से बड़हरिया बाजार पहुंचे थे। वहां उन्होंने एक ऑटो रिक्शा रुकवाया और कुछ बातचीत के बाद घर लौट गए। जिस दो मंजिला पक्के मकान में विस्फोट हुआ, उसमें अमरुद्दीन और उनके बेटे का परिवार रहता था। हादसे के बाद परिवार और आसपास के लोगों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई।
परिवार पहले भी झेल चुका है हादसा और हत्या
स्थानीय जानकारी के मुताबिक, अमरुद्दीन के एक बेटे की वर्ष 2003 में पटाखा बनाने के दौरान मौत हो गई थी। वहीं, उनके बड़े बेटे आजाद आलम की वर्ष 2024 में हत्या कर दी गई थी। आजाद का शव जीबी नगर थाना क्षेत्र के पिपरा गांव के चंवर से मिला था। हत्या के कारणों को लेकर उस समय चर्चा हुई थी। मामले में जांच जारी होने की जानकारी दी गई थी।
रिहायशी इलाके में पटाखा निर्माण, सुरक्षा मानकों पर सवाल
आलमपुर में हुए विस्फोट के बाद रिहायशी इलाकों में पटाखा निर्माण और उनके भंडारण की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि गांव के कई घरों में यह काम होता है।
अब जांच के दौरान यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि पटाखों का निर्माण और भंडारण किन स्थानों पर और किन सुरक्षा मानकों के तहत किया जा रहा था। लगातार धमाकों ने ग्रामीणों में दहशत पैदा कर दी और राहत कार्य को भी मुश्किल बना दिया।
मौके पर पहुंचीं 14 एंबुलेंस, प्रशासनिक टीम ने संभाला मोर्चा
घटना के बाद घायलों को अस्पताल पहुंचाने के लिए 14 एंबुलेंस की व्यवस्था की गई। जिलाधिकारी विजय प्रकाश मीणा, पुलिस अधीक्षक भारत सोनी और सिविल सर्जन समेत प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग की टीमें मौके पर पहुंचीं।
दमकलकर्मियों ने आग बुझाने का प्रयास किया। एफएसएल टीम सहित संबंधित एजेंसियों ने भी जांच शुरू की, ताकि विस्फोट के कारणों और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े तथ्यों का पता लगाया जा सके।
विस्फोट की खबर फैलते ही आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में लोग घटनास्थल पर पहुंच गए। लोग अपने परिजनों की कुशलक्षेम और हादसे में प्रभावित लोगों की जानकारी लेने के लिए परेशान दिखे। भीड़ बढ़ने पर पुलिस ने शाम करीब 7:45 बजे माइकिंग कर लोगों से घर लौटने की अपील की, ताकि राहत और बचाव कार्य में बाधा न आए।


