Ranchi: झारखंड हाईकोर्ट ने जमशेदपुर के बहुचर्चित आर्म्स एक्ट मामले में फैसला सुनाते हुए गैंगस्टर अखिलेश सिंह को बड़ी राहत दी है। अदालत ने राज्य सरकार की उस क्रिमिनल अपील को सिरे से खारिज कर दिया है, जिसमें निचली अदालत द्वारा अखिलेश सिंह को बरी किए जाने के फैसले को चुनौती दी गई थी। हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद निचली अदालत द्वारा दिया गया रिहाई का फैसला पूरी तरह बरकरार रहेगा।

2004 का सिदगोड़ा कांड
यह पूरा मामला साल 2004 में जमशेदपुर के सिदगोड़ा थाना क्षेत्र में दर्ज एक प्राथमिकी से जुड़ा है। उस वक्त पुलिस ने दावा किया था कि गिरफ्तारी के बाद अखिलेश सिंह ने पूछताछ में हथियार छिपाने की बात कबूली थी। पुलिस के मुताबिक, आरोपी की निशानदेही पर एक बंद पड़े क्वार्टर में छापेमारी कर 9 एमएम की एक पिस्टल और जिंदा कारतूस बरामद किए गए थे। इसी आधार पर पुलिस ने आर्म्स एक्ट की गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर चार्जशीट दाखिल की थी।

कमजोर साबित हुए पुलिस के सबूत
हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान अभियोजन और पुलिस के दावों की पोल खुल गई। अदालत ने पाया कि आरोपी के कथित कबूलनामे और हथियारों की बरामदगी को पुख्ता तौर पर साबित करने के लिए रिकॉर्ड पर कोई ठोस सबूत मौजूद नहीं थे। इसके अलावा जिस बंद क्वार्टर से हथियार और कारतूस मिलने की बात कही गई थी, उस जगह पर आरोपी का सीधा दखल या मालिकाना हक भी साबित नहीं किया जा सका।
सरकार की अपील खारिज
मामले की जांच और सबूतों में सामने आई गंभीर खामियों को देखते हुए हाईकोर्ट ने माना कि निचली अदालत का बरी करने का फैसला बिल्कुल सही था। अदालत ने न केवल राज्य सरकार की मुख्य अपील को खारिज कर दिया, बल्कि देरी से दायर की गई अर्जी (विलंब माफी आवेदन) को भी नामंजूर कर दिया। अदालत के इस रुख के बाद राज्य सरकार को बड़ा कानूनी झटका लगा है।


