New Delhi: राजधानी में विरोध प्रदर्शनों से जुड़े मामलों में स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) की ओर से जारी किए जा रहे ‘पीस बॉन्ड’ को लेकर बवाल बढ़ता ही जा रहा है। एक तरफ कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के सह-संयोजक सौरव दास को अदालत ने दिल्ली का निवासी होने का पक्का सबूत देने को कहा है, तो दूसरी तरफ आईसा (AISA) की अध्यक्ष नेहा बोरा ने सीधे तौर पर बगावती रुख अपनाते हुए बॉन्ड भरने से साफ मना कर दिया है। हाईकोर्ट से राहत न मिलने के बावजूद नेहा के इस सख्त रुख ने मामले को और गर्मा दिया है।

दिल्ली में रहने का सबूत मांग रही अदालत
कुछ ही दिन पहले एसईएम अदालत से रिहा हुए सीजेपी नेता सौरव दास और आशुतोष रांका शनिवार को अपने-अपने जमानतदारों के साथ अदालत में पेश हुए। पीस बॉन्ड से जुड़ी शर्तों के उल्लंघन को लेकर चल रही इस प्रक्रिया में अदालत ने सौरव दास से दिल्ली में रहने का कानूनी प्रमाण मांगा था। सुनवाई के दौरान अदालत ने यह बात रेखांकित की कि उनकी तरफ से अब तक रेंट एग्रीमेंट, मकान की रजिस्ट्री या लीज डीड जैसा कोई भी दस्तावेज पेश नहीं किया गया है। अब इन सभी जरूरी कागजातों की जांच और सत्यापन के लिए अदालत ने अगली तारीख 17 नवंबर तय कर दी है।

बॉन्ड साइन करने से साफ इनकार
वहीं दूसरी तरफ, हाल ही में दिल्ली हाईकोर्ट से झटका लगने के बाद भी आईसा अध्यक्ष नेहा बोरा अपने फैसले पर अड़ी हुई हैं। उन्होंने साफ ऐलान कर दिया है कि वे एसईएम अदालत में किसी भी कीमत पर पीस बॉन्ड साइन नहीं करेंगी। नेहा ने इस पूरी कानूनी प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस बॉन्ड पर दस्तखत करने का मतलब यह मान लेना होगा कि देश में किसी भी जायज, लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण विरोध को दबाने के लिए प्रशासन ऐसे हथकंडों का बेजा इस्तेमाल कर सकता है।
पुलिसिया कार्रवाई और नोटिस पर उठाए सवाल
नेहा बोरा ने पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि कानून और व्यवस्था संभालने के नाम पर सिर्फ लाठियां और डंडे चलाए गए। उन्होंने कहा कि इस पूरी कार्रवाई के दौरान आम प्रदर्शनकारियों के साथ-साथ मौके पर मौजूद पत्रकारों और मीडियाकर्मियों को भी पुलिसिया सख्ती और हिंसा झेलनी पड़ी, जो किसी से छिपा नहीं है।
उन्होंने मजिस्ट्रेट की ओर से भेजे गए नोटिस पर सवाल उठाते हुए कहा कि प्रशासन ने उन्हें केवल एक कागज थमा दिया, जिसमें लिखा था कि पुलिस को आशंका है कि वे शांति भंग कर सकती हैं। न तो किसी एफआईआर की कॉपी दी गई और न ही कोई ठोस आधार बताया गया, बल्कि सिर्फ मनगढ़ंत अंदेशों के आधार पर बॉन्ड भरने का दबाव बनाया जा रहा है।


