पटना: बिहार में शुक्रवार सुबह 8 बजे से एमएलसी चुनाव के लिए मतदान जारी है। इसी बीच जेडीयू के पूर्व नेता और मोकामा विधायक अनंत सिंह के समर्थक बताए जाने वाले छोटू सिंह को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। बताया जा रहा है कि पुलिस ने उन्हें पटना के करबिगहिया इलाके के पास से हिरासत में लिया और सीधे जक्कनपुर थाने ले गई। छोटू सिंह ने आरोप लगाया है कि पुलिस ने उन्हें जानबूझकर पकड़ा है।

मतदान के बीच इस घटनाक्रम से पटना में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। छोटू सिंह को हिरासत में लिए जाने से पहले उनका एक ऑडियो संदेश भी वायरल हुआ था, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि पुलिस ने उन्हें घेर लिया है।

छोटू सिंह ने पुलिस पर लगाया जानबूझकर पकड़ने का आरोप
छोटू सिंह के मुताबिक, वह अपनी गाड़ी से जा रहे थे। इसी दौरान पुलिस ने उन्हें पकड़ लिया। फिलहाल उन्हें जक्कनपुर थाने में रखा गया है।
छोटू सिंह का आरोप है कि पुलिस ने उन्हें जानबूझकर हिरासत में लिया है। हालांकि, पुलिस की ओर से हिरासत में लिए जाने के कारणों को लेकर आधिकारिक जानकारी सामने आने का इंतजार है। शुक्रवार को मतदान के दौरान पटना में कई तरह की गतिविधियां देखने को मिल रही हैं। ऐसे में छोटू सिंह को हिरासत में लिए जाने का मामला भी चर्चा में है।
अनंत सिंह ने थाने में छोटू सिंह को किया वीडियो कॉल
छोटू सिंह को जब पुलिस थाने में बैठाए हुए थी, उसी दौरान मोकामा विधायक अनंत सिंह ने उन्हें वीडियो कॉल किया। इससे पहले छोटू सिंह का एक ऑडियो संदेश वायरल हुआ था, जिसमें उन्होंने कहा था कि प्रशासन ने उन्हें घेर लिया है और उठा लिया है। इस घटनाक्रम के बाद एमएलसी चुनाव के बीच अनंत सिंह और उनके समर्थकों से जुड़ी गतिविधियां भी चर्चा में आ गई हैं।
जेडीयू से छह साल के लिए निष्कासित हुए थे छोटू सिंह
छोटू सिंह जेडीयू के पूर्व नेता हैं। उन्हें पार्टी ने दल-विरोधी गतिविधियों और अनुशासनहीनता के आरोप में छह साल के लिए निष्कासित कर दिया था। उन्हें मोकामा विधायक अनंत सिंह का समर्थक माना जाता है।
जानकारी के मुताबिक, जेडीयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा की नई टीम में जगह नहीं मिलने के बाद छोटू सिंह ने बगावती तेवर दिखाए थे। प्रदेश पदाधिकारी नहीं बनाए जाने से नाराजगी के बीच उनकी पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा से तीखी बहस और हंगामे की बात भी सामने आई थी।
इसके बाद पार्टी नेतृत्व ने उन्हें आधिकारिक कार्यक्रमों और जेडीयू कार्यालय में मंत्रियों की जनसुनवाई में बैठने से मना कर दिया था। बाद में उन्हें छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया गया।


