
New Delhi: सुप्रीम कोर्ट दशहरा अवकाश के बीच भी दो अहम मामलों की सुनवाई करने जा रहा है. 21 अक्टूबर को जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की विशेष पीठ केरल के पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन से जुड़े कथित भ्रष्टाचार मामले और आंध्र प्रदेश में शहरी निकाय चुनावों को लेकर वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (YSRCP) की याचिका पर सुनवाई करेगी.

पिनाराई विजयन ने सुप्रीम कोर्ट का रुख क्यों किया?
केरल के पूर्व मुख्यमंत्री और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष पिनाराई विजयन ने केरल हाई कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें कथित वित्तीय अनियमितताओं के मामले में एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया गया था. इस मामले में उनकी बेटी वीणा टी और उनके दामाद पीए मोहम्मद रियास ने भी कानूनी राहत के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया है. यह मामला कोचिन मिनरल्स एंड रूटाइल लिमिटेड (CMRL) और वीणा की कंपनी एक्सालॉजिक सॉल्यूशंस के बीच हुए कथित वित्तीय लेनदेन से संबंधित है. प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने आरोप लगाया है कि कंपनी को आईटी कंसल्टेंसी सेवाओं के नाम पर 2.78 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया, जिसे एजेंसी ने संदिग्ध बताया है.
हालांकि, ये आरोप हैं और मामले में अंतिम न्यायिक निष्कर्ष आना बाकी है.

विजयन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा ने सुप्रीम कोर्ट में जल्द सुनवाई की मांग की थी. इससे पहले केरल हाई कोर्ट ने एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया था. इसके बाद विजयन और उनके परिजनों ने उस आदेश को चुनौती दी. ईडी ने भी मामले से संबंधित जांच के सिलसिले में विजयन को पूछताछ के लिए समन जारी किया है.
YSRCP ने चुनाव में अतिरिक्त समय मांगा
सुप्रीम कोर्ट के सामने दूसरा मामला आंध्र प्रदेश की राजनीति से जुड़ा है. वाईएसआर कांग्रेस पार्टी ने शहरी निकाय चुनावों में नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख बढ़ाने की मांग की है.
पार्टी का आरोप है कि सत्तारूढ़ दल के समर्थकों की धमकी और हिंसा के कारण उसके कई उम्मीदवार नामांकन दाखिल नहीं कर सके. इसी आधार पर YSRCP ने अदालत से नामांकन की समय-सीमा बढ़ाने के साथ अतिरिक्त नामांकन केंद्र खोलने और उम्मीदवारों को पुलिस सुरक्षा उपलब्ध कराने की मांग की है. पार्टी का नेतृत्व वाईएस जगन मोहन रेड्डी करते हैं. याचिका में उठाए गए मुद्दों पर अब सुप्रीम कोर्ट की विशेष पीठ सुनवाई करेगी.
दोनों मामलों में क्या होगा अहम?
एक तरफ पिनाराई विजयन और उनके परिजन कथित वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े मामले में एफआईआर के आदेश को चुनौती दे रहे हैं. दूसरी तरफ YSRCP चुनावी प्रक्रिया में अपने उम्मीदवारों को पर्याप्त अवसर और सुरक्षा देने की मांग कर रही है.
21 अक्टूबर की सुनवाई में इन दोनों मामलों में अदालत का रुख महत्वपूर्ण होगा. हालांकि, सुनवाई से पहले यह कहना उचित नहीं होगा कि अदालत याचिकाकर्ताओं को राहत देगी या नहीं. इसका फैसला सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष रखे गए तथ्यों और कानूनी दलीलों के आधार पर होगा.


