Pakur: पाकुड़ जिले में धरमपुर मोड़ से पाकुड़ के बीच नेशनल हाईवे (NH-333A) के काम ने रफ्तार तो पकड़ी है, लेकिन इसके साथ उड़ रही धूल ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है। सड़क पर हर वक्त धूल का ऐसा घना गुबार छाया रहता है कि सामने से आ रही गाड़ियां तक नजर नहीं आतीं। विजिबिलिटी बेहद कम होने से कभी भी कोई बड़ा सड़क हादसा हो सकता है। रास्ते से गुजरने वाले बाइकर्स और पैदल राहगीर इस धूल भरी आफत से सबसे ज्यादा परेशान हैं।



करोड़ों की परियोजना
धरमपुर मोड़ से पाकुड़ तक करीब 36.60 किलोमीटर लंबी सड़क को दो लेन और पक्के शोल्डर के साथ तैयार किया जा रहा है। इस पूरी योजना की स्वीकृत लागत करीब 255.73 करोड़ रुपये है। निविदा रिकॉर्ड्स के मुताबिक यह काम लगभग 151 करोड़ रुपये की बोली के साथ ‘एम एंड एस पेविंग प्राइवेट लिमिटेड’ को सौंपा गया है। प्रोजेक्ट को पूरा करने का टारगेट मई 2027 तय किया गया है। सड़क बनने से इलाके की कनेक्टिविटी तो जरूर सुधरेगी, लेकिन मौजूदा हालात लोगों की सेहत पर भारी पड़ रहे हैं।

सेहत पर सीधा असर
सड़क के दोनों ओर बसे गांवों के लोग, छोटे दुकानदार और रोज आने-जाने वाले दैनिक यात्री इस धूल के सीधे शिकार हो रहे हैं। दिनभर हवा में तैरते धूल के बारीक कणों की वजह से लोगों को आंखों में जलन और सांस लेने में भारी तकलीफ का सामना करना पड़ रहा है। खासकर बुजुर्गों और बच्चों के लिए यह माहौल बीमारी की वजह बन रहा है। बिना मास्क लगाए इस रूट से निकलना अपनी सेहत को सीधा दांव पर लगाने जैसा है।
नियमों की अनदेखी
निर्माण कार्य के दौरान डस्ट कंट्रोल के जो सख्त नियम होने चाहिए, वे मौके से पूरी तरह नदारद हैं। एजेंसी की तरफ से न तो नियमित तौर पर पानी का छिड़काव किया जा रहा है और न ही सड़क पर पसरी सूखी मिट्टी को हटाने का कोई ठोस इंतजाम है। अब सीधे तौर पर यह सवाल उठ रहा है कि करोड़ों रुपये के बजट वाली परियोजना में एजेंसी बेसिक प्रदूषण नियंत्रण और सेफ्टी गाइडलाइंस का पालन क्यों नहीं कर रही है। स्थानीय लोगों की मांग है कि संबंधित विभाग तुरंत मौके का जायजा ले और जब तक काम चले, तब तक पानी के छिड़काव का पुख्ता इंतजाम कराए।


