Jharkhand junior doctors: झारखंड के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में जूनियर रेजिडेंट डॉक्टरों के मानदेय (स्टाइपेंड) में की गई बढ़ोतरी से स्वास्थ्य सेवाओं के स्तर में बड़ा सुधार देखने को मिल रहा है। स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने इस कदम को बेहद अहम बताते हुए कहा कि डॉक्टरों को बेहतर सुविधाएं और वाजिब मानदेय मिलने से उनका मनोबल बढ़ा है, जिसका सीधा फायदा अस्पतालों में आने वाले मरीजों को मिल रहा है। इसके साथ ही रिनपास (RINPAS), कांके में तैनात डीएनबी (DNB) प्रशिक्षणार्थियों के मानदेय में हुए संशोधन को भी उन्होंने मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं के लिए मील का पत्थर करार दिया।

सैलरी में ₹17 हजार तक की बढ़ोतरी
स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि राज्य सरकार ने जूनियर डॉक्टरों की मांग को संवेदनशीलता से लेते हुए कुछ महीने पहले बड़ा फैसला लिया था। इस फैसले के तहत प्रथम वर्ष के जूनियर रेजिडेंट्स का मासिक मानदेय ₹54,500 से सीधे बढ़ाकर ₹70,000 कर दिया गया। इसी तरह द्वितीय वर्ष के डॉक्टरों का मानदेय ₹58,500 से बढ़ाकर ₹75,000 और तृतीय वर्ष के डॉक्टरों का मानदेय ₹63,000 से बढ़ाकर ₹80,000 प्रति माह किया गया है। इस बदलाव से डॉक्टरों की जेब में हर महीने ₹15,500 से लेकर ₹17,000 तक की सीधी बढ़ोतरी हुई है।

मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं पर फोकस
डॉ. अंसारी ने रिनपास में सेवाएं दे रहे डॉक्टरों की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि मानसिक स्वास्थ्य बेहद संवेदनशील क्षेत्र है। यहां काम करने वाले डीएनबी डॉक्टरों को उचित मानदेय और बेहतर माहौल मिलने से मानसिक रोगों की जांच, समय पर उपचार और मरीजों की देखभाल की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार आ रहा है। जब डॉक्टरों को आर्थिक सुरक्षा का भरोसा मिलता है, तो वे पूरे समर्पण के साथ मरीजों की सेवा में जुट जाते हैं।
सिर्फ मानदेय नहीं, व्यवस्था बदलना मकसद
स्वास्थ्य मंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार की प्राथमिकता केवल मानदेय बढ़ाना भर नहीं है, बल्कि पूरे सरकारी स्वास्थ्य ढांचे को बदलना है। उन्होंने कहा कि डॉक्टर दिन-रात अस्पतालों में रहकर जिंदगियां बचाते हैं, इसलिए उन्हें सम्मान और काम करने का बेहतरीन माहौल देना सरकार का फर्ज है। सरकार का अंतिम लक्ष्य अस्पतालों में आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं मुहैया कराना, बुनियादी ढांचे को मजबूत करना और राज्य के हर नागरिक तक बेहतर इलाज पहुंचाना है।


