Pakistan: पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने देश के वरिष्ठ नौकरशाहों की निष्ठा पर सवाल खड़े किए हैं. उनका आरोप है कि कई सरकारी अधिकारी देश में अहम पदों पर रहते हुए ही विदेश में स्थायी रूप से बसने की तैयारी कर रहे थे. इस मामले में पुर्तगाल का नाम खास तौर पर सामने आया है. आसिफ के बयान के बाद पाकिस्तान के सरकारी तंत्र में पारदर्शिता और अधिकारियों की जवाबदेही को लेकर बहस तेज हो गई है.

ख्वाजा आसिफ ने क्या आरोप लगाए?
ख्वाजा आसिफ ने 18 अक्टूबर को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के जरिए यह मुद्दा उठाया. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की नौकरशाही में ईमानदार और काबिल अधिकारी भी हैं, लेकिन बड़ी संख्या में ऐसे अधिकारी भी हैं, जिन्होंने कनाडा, अमेरिका, ब्रिटेन और यूरोप के दूसरे देशों को अपना स्थायी ठिकाना बना लिया है.

रक्षा मंत्री के मुताबिक, कुछ अधिकारियों ने सरकारी सेवा में रहते हुए ही विदेश में बसने की योजना तैयार कर ली थी. उन्होंने सवाल उठाया कि जब अधिकारी देश के महत्वपूर्ण पदों पर काम करते हैं, तो क्या उस दौरान उनकी प्राथमिकता पाकिस्तान की सेवा होती है या वे इसे विदेश जाने से पहले का एक पड़ाव मानते हैं?
आसिफ ने यह भी कहा कि संबंधित अधिकारियों में से कुछ प्रभावशाली पदों पर रह चुके हैं और अलग-अलग सरकारों के साथ उनके करीबी संबंध रहे हैं.
पुर्तगाल को लेकर क्यों चर्चा में है मामला?
ख्वाजा आसिफ ने अपने बयान में पुर्तगाल का विशेष रूप से जिक्र किया. उनके अनुसार, हाल के वर्षों में यह देश पाकिस्तान के कुछ नौकरशाहों के लिए विदेश में स्थायी रूप से बसने का पसंदीदा ठिकाना बनकर उभरा है.
उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ प्रभावशाली अधिकारियों के लिए स्थायी निवास यानी परमानेंट रेजिडेंसी (PR) की व्यवस्था कराने वाला एक व्यक्ति बड़ी रकम लेने के बाद फरार हो गया. हालांकि, रक्षा मंत्री ने इस व्यक्ति की पहचान, कथित लेनदेन की रकम या मामले से जुड़े अधिकारियों के नाम सार्वजनिक नहीं किए.
उन्होंने अपने आरोपों के समर्थन में कोई दस्तावेजी सबूत भी पेश नहीं किया. इसलिए फिलहाल इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है.
सरकारी पद और विदेश में बसने की योजना पर उठे सवाल
ख्वाजा आसिफ ने इस मुद्दे को केवल विदेश में संपत्ति या निवास हासिल करने तक सीमित नहीं रखा, बल्कि सरकारी अधिकारियों की जिम्मेदारी और देश के प्रति उनकी प्रतिबद्धता पर भी सवाल उठाए.
उनका कहना है कि सरकारी सेवा के दौरान अधिकारियों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां, सुविधाएं और प्रभावशाली लोगों का समर्थन मिलता है. ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या वे अपने पूरे कार्यकाल में देश के प्रति जवाबदेह रहते हैं या भविष्य में विदेश में बसने की तैयारी करते रहते हैं.
हालांकि, विदेश में संपत्ति खरीदना या किसी दूसरे देश में स्थायी निवास की योजना बनाना अपने आप में भ्रष्टाचार का प्रमाण नहीं है. आरोपों की पुष्टि के लिए संबंधित अधिकारियों के वित्तीय रिकॉर्ड, संपत्ति के विवरण और अन्य दस्तावेजों की जांच जरूरी होगी.
पहले भी पुर्तगाल को लेकर दावा कर चुके हैं आसिफ
यह पहली बार नहीं है जब पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ने इस मुद्दे को उठाया है. अगस्त 2025 में भी उन्होंने दावा किया था कि देश की आधी से अधिक नौकरशाही के लोगों ने पुर्तगाल में संपत्तियां खरीदी हैं और वहां की नागरिकता हासिल करने की तैयारी कर रहे हैं.
उस समय भी उन्होंने कुछ अधिकारियों पर भ्रष्टाचार से अर्जित धन विदेश भेजने का आरोप लगाया था. इन दावों के बाद पाकिस्तान में सरकारी अधिकारियों की विदेशी संपत्तियों को लेकर सवाल उठे थे.
हालांकि, पुराने और नए आरोपों को अलग-अलग देखना जरूरी है. किसी दावे का बार-बार दोहराया जाना उसकी पुष्टि नहीं करता. इसके लिए आधिकारिक जांच और विश्वसनीय दस्तावेजों की जरूरत होती है.


