
International News: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फ्रांस में जारी भारी बवाल, हिंसा और प्रदर्शनों के बीच राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की इमिग्रेशन पॉलिसी को सीधे तौर पर कटघरे में खड़ा कर दिया है। व्हाइट हाउस के बाहर मीडिया से बात करते हुए ट्रंप ने दावा किया कि उन्होंने सालों पहले ही अपने दोस्त मैक्रों को चेताया था कि दुनिया के अलग-अलग हिस्सों से भारी संख्या में लोगों को फ्रांस में आने की अनुमति देना एक बहुत बड़ी भूल साबित होगी। ट्रंप के अनुसार मैक्रों ने उनकी इस सलाह को गंभीरता से नहीं लिया, जिसका नतीजा यह है कि पेरिस का पूरा सामाजिक ताना-बाना बदल रहा है और हालात बेकाबू हो रहे हैं। उन्होंने फ्रांस समेत पूरे यूरोप को अपने बॉर्डर्स पर सख्त नियम लागू करने की नसीहत दी।

फ्रांस में भारी बवाल
दूसरी तरफ फ्रांस में जमीनी हकीकत यह है कि इन प्रदर्शनों की शुरुआत स्कूलों में शिक्षकों की कमी और खराब व्यवस्था को लेकर छात्रों के आंदोलन से हुई थी, जो आगे चलकर महंगाई, भारी खर्चों और लचर सरकारी सेवाओं के खिलाफ बड़े जनाक्रोश में बदल गई। देखते ही देखते राजधानी पेरिस, लिली और नीस समेत कई प्रमुख शहरों में हिंसक झड़पें, आगजनी और दुकानों में तोड़फोड़ शुरू हो गई। स्थिति को काबू में करने के लिए पेरिस के कुछ संवेदनशील इलाकों में रात 11 बजे से सुबह 6 बजे तक का कर्फ्यू लगाया गया है। फ्रांस के गृह मंत्रालय के अनुसार अब तक करीब 2400 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि 1000 के करीब पुलिस जवान घायल हुए हैं और लगभग 3000 दुकानों को नुकसान पहुंचा है।

मैक्रों ने की अपील
बिगड़ती कानून-व्यवस्था पर फ्रांस के PM सेबास्टियन लेकोर्नू ने कहा है कि चुनिंदा इलाकों में पाबंदियां लगाई जा रही हैं और यदि हालात नहीं सुधरे तो इमरजेंसी लगाने से भी परहेज नहीं किया जाएगा। वहीं राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने राष्ट्र के नाम संबोधन में साफ किया कि किसी भी जायज मांग के नाम पर हिंसा और तोड़फोड़ को सही नहीं ठहराया जा सकता। मैक्रों ने आम नागरिकों की आर्थिक चिंताओं को समझने और समाधान निकालने का भरोसा दिया, लेकिन उपद्रवियों से सख्ती से निपटने की बात कही। फ्रांस सरकार जहां एक ओर शांति बहाली में जुटी है, वहीं ट्रंप के बयानों ने इस मामले को वैश्विक स्तर पर एक नई बहस में बदल दिया है।


