
Manho Village Jatra: विजयादशमी के पावन अवसर पर झारखंड की संस्कृति का एक बेहद खूबसूरत और जीवंत रूप देखने को मिला। सदर प्रखंड के मन्हो गांव में आयोजित भव्य पारंपरिक जतरा मेले में मुख्य अतिथि के रूप में सुखदेव भगत ने शिरकत की। इस दौरान वहां का माहौल पूरी तरह से पारंपरिक लोक संस्कृति, उमंग और आदिवासी परंपरा के रंगों में रंगा हुआ नजर आया।

संस्कृति और विरासत का प्रतीक है जतरा

इस मौके पर अपनी बात रखते हुए उन्होंने कहा कि जतरा सिर्फ एक मेला नहीं, बल्कि आदिवासी समाज की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, परंपरा और सामूहिक एकता का सबसे बड़ा प्रतीक है। यह हमारी वह अनमोल धरोहर है जो हमें हमारे पूर्वजों से मिली है। अखड़ा, नगाड़ा, मांदर और जतरा ही हमारी असली पहचान और पहचान की असली ताकत हैं, जिन्हें संभालकर रखना हम सबकी जिम्मेदारी है।
नई पीढ़ी से की खास अपील
आधुनिकता की इस अंधी दौड़ में आज लोग अपनी जड़ों से दूर होते जा रहे हैं, जो चिंता का विषय है। इसी बात पर जोर देते हुए उन्होंने युवा साथियों से खास अपील की कि वे अपनी परंपराओं और रीति-रिवाजों पर गर्व करें। अपनी सांस्कृतिक विरासत को केवल खुद तक सीमित न रखें, बल्कि इसे आने वाली पीढ़ियों तक भी पहुंचाएं ताकि हमारी माटी की खुशबू हमेशा यूं ही बरकरार रहे।


