
Dussehra 2026: आज मंगलवार, 20 अक्टूबर को देशभर में दशहरा यानी विजयादशमी का त्योहार मनाया जा रहा है। बुराई पर अच्छाई की जीत के इस पर्व पर जगह-जगह रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतले जलाए जाएंगे। वहीं, कई घरों में शस्त्र पूजा, देवी अपराजिता और शमी के पेड़ की पूजा भी की जाएगी। अगर आप भी आज पूजा करने या रावण दहन देखने की तैयारी कर रहे हैं, तो यह जानना जरूरी है कि कौन-सा समय शुभ माना गया है। दिए गए पंचांग के अनुसार, आज रावण दहन के लिए शाम 5:47 बजे से रात 8:23 बजे तक का समय बताया गया है, जबकि शस्त्र पूजा के लिए दोपहर में शुभ मुहूर्त रहेगा।

हिंदू मान्यताओं के अनुसार, दशहरा भगवान राम की रावण पर विजय की याद में मनाया जाता है। यह त्योहार हमें बुराई, अहंकार और अन्याय के खिलाफ अच्छाई की जीत का संदेश देता है। इसी वजह से इसे विजयादशमी भी कहा जाता है।

दशहरा की तिथि और शस्त्र पूजा का शुभ मुहूर्त
दिए गए पंचांग के अनुसार, आश्विन महीने के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि 20 अक्टूबर को दोपहर 12:51 बजे शुरू होगी और 21 अक्टूबर को दोपहर 2:11 बजे समाप्त होगी। इस गणना के आधार पर 20 अक्टूबर को दशहरा मनाने की बात कही गई है।
विजयादशमी पर शस्त्र पूजा की पुरानी परंपरा है। मान्यता है कि इस दिन शस्त्रों की पूजा करने से साहस, शक्ति और विजय का आशीर्वाद मिलता है।
शस्त्र पूजा के लिए विजय मुहूर्त दोपहर 1:59 बजे से 2:45 बजे तक और अपराह्न पूजा मुहूर्त दोपहर 1:14 बजे से शाम 3:30 बजे तक बताया गया है।
इसके अलावा शुभ कार्यों के लिए सुबह 6:24 से 7:49 बजे तक अमृत चौघड़िया, सुबह 9:15 से 10:40 बजे तक शुभ चौघड़िया, दोपहर 2:56 से शाम 4:22 बजे तक लाभ चौघड़िया और शाम 4:22 से 5:47 बजे तक अमृत चौघड़िया बताया गया है।
रावण दहन कितने बजे होगा?
दशहरा पर रावण दहन के लिए प्रदोष काल को शुभ माना जाता है। दिए गए पंचांग के मुताबिक, आज शाम 5:47 बजे से रात 8:23 बजे तक प्रदोष काल रहेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस समय रावण दहन करना शुभ माना जाता है।
हालांकि, अलग-अलग शहरों में रावण दहन का वास्तविक समय स्थानीय आयोजन समितियां तय करती हैं। इसलिए अपने शहर में रावण दहन देखने जाने से पहले कार्यक्रम का समय जरूर पता कर लें।
जो लोग रात में विशेष पूजा करना चाहते हैं, उनके लिए निशीता काल रात 11:41 बजे से अगले दिन रात 12:31 बजे तक बताया गया है।
रावण दहन से पहले अपराजिता और शमी की पूजा
विजयादशमी पर देवी अपराजिता की पूजा का भी विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि माता अपराजिता की आराधना से जीवन में सुख-शांति और सफलता का आशीर्वाद मिलता है।
पूजा के लिए साफ स्थान पर चौकी रखकर उस पर देवी अपराजिता की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित करें। इसके बाद फूल, अक्षत, कुमकुम, धूप, फल और मिठाई अर्पित करें। पूजा के दौरान ‘ॐ अपराजितायै नमः’ मंत्र का जाप कर सकते हैं। अंत में देवी की आरती करें।
दशहरे के दिन शमी के पेड़ की पूजा करने की भी परंपरा है। प्रदोष काल में शमी वृक्ष की जड़ में जल चढ़ाकर दीपक जलाया जाता है। इसके बाद फूल, धूप और अन्य पूजा सामग्री से शमी वृक्ष की पूजा की जाती है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, विजयादशमी पर शमी पूजा और शस्त्र पूजा करना शुभ माना जाता है।
ध्यान दें: ऊपर दिए गए पूजा और रावण दहन के मुहूर्त उपलब्ध पंचांग विवरण पर आधारित हैं। स्थानीय सूर्योदय-सूर्यास्त और पंचांग की गणना के अनुसार समय में अंतर हो सकता है। पूजा से पहले अपने शहर के स्थानीय पंचांग से समय की पुष्टि कर लें।


