International: मिडिल ईस्ट में एक बार फिर तनाव बढ़ने की आशंका है. इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ईरान के खिलाफ बड़े सैन्य अभियान की तैयारी कर रहे थे. इस बार निशाने पर परमाणु ठिकानों और सरकारी प्रतिष्ठानों के अलावा बिजली संयंत्र जैसे नागरिक बुनियादी ढांचे भी थे. हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विरोध के बाद इस योजना को फिलहाल टाल दिया गया.

अक्टूबर में हमले की तैयारी कर रहा था इजरायल
रिपोर्ट के मुताबिक, इजरायली सेना ने 10 अक्टूबर के आसपास ईरान पर कई दिनों तक चलने वाले हवाई हमले की योजना बनाई थी. इसकी तीव्रता फरवरी में अमेरिका और इजरायल की ओर से किए गए हमलों से भी अधिक हो सकती थी.

प्रस्तावित अभियान में ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े ठिकानों और वहां की सरकार से संबंधित प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने की तैयारी थी. इसके साथ ही बिजली संयंत्रों जैसे नागरिक बुनियादी ढांचे को भी संभावित लक्ष्यों की सूची में शामिल किया गया था.
बताया गया है कि इजरायल ने उन ठिकानों की एक नई सूची भी तैयार की थी, जिन्हें फरवरी में हुए हमलों के दौरान निशाना नहीं बनाया गया था. हालांकि, इस अभियान को लेकर अंतिम फैसला नहीं हो सका और योजना को आगे बढ़ाने से रोक दिया गया.
ट्रंप ने क्यों जताई हमले पर आपत्ति?
रिपोर्ट के अनुसार, डोनाल्ड ट्रंप नहीं चाहते थे कि अमेरिका में होने वाले मध्यावधि चुनावों से पहले ईरान के साथ संघर्ष दोबारा भड़क उठे. अमेरिका में 3 नवंबर को मध्यावधि चुनाव होने हैं. ऐसे में पश्चिम एशिया में युद्ध का विस्तार ट्रंप प्रशासन के लिए राजनीतिक और आर्थिक चुनौतियां खड़ी कर सकता है.
ट्रंप पहले भी कह चुके हैं कि मध्यावधि चुनावों से पहले अमेरिका ईरान पर हमला नहीं करेगा. ऐसे में इजरायल की प्रस्तावित सैन्य कार्रवाई को रोकने के पीछे चुनावों का समय एक अहम वजह माना जा रहा है.
हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि प्रस्तावित अभियान में अमेरिकी सेना सीधे तौर पर शामिल होने वाली थी या इजरायल अकेले कार्रवाई करने की तैयारी कर रहा था.
क्या फिर शुरू हो सकती है ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई?
हमले की योजना फिलहाल टलने के बावजूद ईरान को लेकर अमेरिका और इजरायल का रुख सख्त बना हुआ है. दोनों देशों के नेताओं की ओर से संकेत दिए गए हैं कि ईरान से जुड़े मुद्दों पर उनकी कार्रवाई अभी पूरी नहीं हुई है.
रिपोर्ट में एक सूत्र के हवाले से यह संभावना भी जताई गई है कि आने वाले हफ्तों में अमेरिका और इजरायल मिलकर ईरान के खिलाफ फिर से सैन्य अभियान शुरू कर सकते हैं. हालांकि, इस संबंध में किसी निश्चित तारीख या अंतिम फैसले की पुष्टि नहीं हुई है.
इस बीच, ईरान के साथ बातचीत और दबाव की रणनीति भी अहम बनी हुई है. अमेरिका चाहता है कि ईरान परमाणु कार्यक्रम समेत विवादित मुद्दों पर उसकी शर्तों के अनुरूप समझौता करे. होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़ा विवाद भी इस तनाव का महत्वपूर्ण हिस्सा है. वैश्विक तेल आपूर्ति के लिहाज से यह समुद्री मार्ग बेहद अहम है.
इजरायल दौरे पर पहुंचे अमेरिकी रक्षा मंत्री
रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने हाल ही में इजरायल का दौरा किया था. इस दौरान उन्होंने नेतन्याहू और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात की.
बताया गया है कि इस बातचीत के दौरान इजरायली अधिकारियों ने संभावित सैन्य कार्रवाई के लिए तैयार की गई नई लक्ष्यों की सूची भी पेश की. इसमें ऐसे ठिकाने शामिल थे, जिन्हें पहले के हमलों में निशाना नहीं बनाया गया था. नागरिक बुनियादी ढांचे से जुड़े कुछ स्थान भी इस सूची का हिस्सा थे.
हालांकि, इन मुलाकातों के दौरान क्या निर्णय लिया गया और भविष्य में अमेरिका किस तरह की भूमिका निभाएगा, इसे लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है.
नेतन्याहू ने ईरानी सरकार को हटाने की बात दोहराई
ईरान के खिलाफ अपने सख्त रुख को दोहराते हुए नेतन्याहू ने कहा है कि क्षेत्र में मौजूद खतरे को खत्म करने के लिए ईरानी शासन को सत्ता से हटाना जरूरी है.
उन्होंने दावा किया कि इजरायल ने ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षाओं और अपने देश के खिलाफ पैदा हुए खतरों को रोकने के लिए कार्रवाई की है. नेतन्याहू ने यह भी संकेत दिया कि इजरायली सेना और खुफिया एजेंसियां इस दिशा में काम कर रही हैं.
नेतन्याहू और ट्रंप के बयानों से संकेत मिलता है कि ईरान को लेकर तनाव अभी खत्म नहीं हुआ है. फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या दोनों देश बातचीत के जरिए किसी समझौते तक पहुंचेंगे या आने वाले दिनों में सैन्य टकराव का नया दौर शुरू होगा.


