
Jharkhand High Court: ट्रेन आने से पहले बंद रेलवे फाटक को जबरन पार करने या उसका बैरियर तोड़ने की कोशिश अब बेहद भारी पड़ने वाली है। झारखंड HC ने एक अहम मामले की सुनवाई करते हुए साफ कर दिया है कि रेलवे लेवल क्रॉसिंग पर बंद गेट, चेन या बैरियर को तोड़ना रेलवे अधिनियम की धारा 160(2) के तहत गैर-जमानती अपराध है। अदालत के इस कड़े रुख के बाद अब ऐसे मामलों में पकड़े जाने पर आरोपियों को अधिकार के तौर पर बेल नहीं मिल सकेगी, बल्कि उन्हें सामान्य गैर-जमानती मामलों की सख्त कानूनी प्रक्रिया और शर्तों से गुजरना होगा।

पुराने आदेश में संशोधन
यह पूरा मामला स्कूटी से रेलवे फाटक टकराने की एक घटना से जुड़ा है, जिसमें आरोपी आनंद कुमार यादव ने अग्रिम जमानत की गुहार लगाई थी। पूर्व में 7 मई 2026 को HC ने इस अपराध को जमानती मानते हुए अग्रिम जमानत खारिज कर दी थी और नियमित जमानत लेने की बात कही थी। इसके बाद RPF और केंद्र सरकार ने अदालत का रुख कर दलील दी कि धारा 160(2) में पांच साल तक की सजा का प्रावधान है, इसलिए इसे जमानती मानना प्रक्रिया के लिहाज से सही नहीं था। HC ने RPF के तर्कों, SC के पुराने नजीर फैसलों और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के वर्गीकरण को सही मानते हुए अपने पूर्व आदेश में सुधार किया और इसे गैर-जमानती अपराध करार दिया।

रेलवे सुरक्षा होगी मजबूत
कानूनी प्रावधानों के तहत बंद क्रॉसिंग का गेट अवैध रूप से खोलने पर जहां 3 साल तक की सजा हो सकती है, वहीं बैरियर या गेट तोड़ने पर अधिकतम 5 साल की जेल का नियम है। HC के इस आदेश से रेलवे ट्रैक और लेवल क्रॉसिंग पर सुरक्षा व्यवस्था को काफी मजबूती मिलेगी। अक्सर लोग जल्दबाजी के चक्कर में बंद फाटक के नीचे से निकलने या बैरियर में टक्कर मारने का जोखिम उठाते हैं, जिससे बड़ी रेल दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है। अब इस कानूनी स्पष्टता के बाद नियम तोड़ने वालों पर सख्त कार्रवाई का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है।


